FTA, PLI और China+1 रणनीति से भारत को मिलेगा बड़ा बूस्ट, 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य संभव

भारत के हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म Yes Securities का मानना है कि FTA, PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना और China+1 रणनीति के सहारे भारत 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 95 लाख करोड़ रुपये) के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट का लक्ष्य हासिल कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, UAE, ऑस्ट्रेलिया, UK और EFTA देशों के साथ हुए व्यापार समझौते भारतीय उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंच दिलाने में मदद करेंगे। वहीं ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी समझौतों पर बातचीत जारी है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को होगा बड़ा फायदा
इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और मशीनरी जैसे क्षेत्रों को इन समझौतों से सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे उत्पादन और निर्यात दोनों में तेजी आएगी और भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी।
निजी निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
Yes Securities का कहना है कि बढ़ती निर्यात मांग निजी निवेश (Private Capex) को भी बढ़ावा दे सकती है। फिलहाल कई उद्योगों में क्षमता उपयोग लगभग 75 प्रतिशत है, लेकिन निर्यात बढ़ने पर कंपनियां नई उत्पादन क्षमता में निवेश कर सकती हैं। इससे रोजगार और औद्योगिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
सेवाओं के निर्यात के लिए नए अवसर
भारत ने 2030 तक कुल 2 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं दोनों का योगदान महत्वपूर्ण होगा। UK और EU जैसे बाजारों के साथ समझौते IT, कंसल्टिंग, इंजीनियरिंग रिसर्च एवं डेवलपमेंट और वित्तीय सेवाओं के लिए नए अवसर खोल सकते हैं।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बाजार तक पहुंच मिलना पर्याप्त नहीं होगा। भारत को लॉजिस्टिक्स लागत, महंगी बिजली, जटिल नियमों और कम श्रम उत्पादकता जैसी चुनौतियों से भी निपटना होगा। इन समस्याओं का समाधान होने पर ही FTA का पूरा लाभ मिल सकेगा और व्यापार घाटे का जोखिम कम होगा।

