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नाबालिग बेटे से हादसे में दुकानदार की मौत, जज पिता पर केस दर्ज करने की मंजूरी; 104 की स्पीड से दौड़ रही थी मर्सिडीज

कोच्चि। केरल में 17 साल के नाबालिग बेटे की मर्सिडीज कार से हुए हादसे में एक दुकानदार की मौत (HADSA) के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। केरल हाईकोर्ट ने कार के मालिक और नाबालिग के पिता, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत केस दर्ज करने की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने मामले में रिपोर्ट भी मांगी है। हादसे में 55 वर्षीय दुकानदार जयबालकृष्णन की मौत हो गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हादसा शनिवार देर रात करीब 2:20 बजे हुआ। उस समय मर्सिडीज करीब 104 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। कार की टक्कर स्कूटर सवार जयबालकृष्णन से हुई। टक्कर इतनी तेज थी कि स्कूटर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और दुकानदार की जान चली गई।

मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। पहले लापरवाही से मौत का केस दर्ज किया गया और नाबालिग को जमानत मिल गई। बाद में विरोध बढ़ने पर गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धारा जोड़ी गई और नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया। बोर्ड ने भी उसे जमानत दे दी। इसके बाद मृतक के परिवार ने कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए पुलिस थाने के सामने धरना दिया।

हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद पिता की भूमिका की जांच

इस मामले में कार के मालिक पिता के खिलाफ कार्रवाई (HADSA) की मांग की जा रही थी। हाईकोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत केस दर्ज करने की अनुमति दी है। यह प्रावधान नाबालिग द्वारा वाहन चलाने से जुड़े अपराधों और वाहन के जिम्मेदार मालिक या अभिभावक की जवाबदेही से संबंधित है।

मामले में पिता की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुर्घटना के समय कार उनका नाबालिग बेटा चला रहा था। पुलिस अब मामले में कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट भी मांगी है, जिससे जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इस मामले ने नाबालिगों को वाहन देने और अभिभावकों की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नाबालिग के वाहन चलाने के मामलों में वाहन मालिक या अभिभावक की जिम्मेदारी तय करने के प्रावधान हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की कानूनी जवाबदेही जांच में सामने आए तथ्यों और लागू कानून के आधार पर तय होती है।

मृतक के परिवार ने कहा- शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए

जयबालकृष्णन की रिश्तेदार जयलक्ष्मी थंकराज ने हादसे की भयावहता बताते हुए कहा कि उनके अंकल की मौत बेहद दर्दनाक परिस्थितियों में हुई। उनके मुताबिक, टक्कर के बाद जयबालकृष्णन के शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे।

परिवार ने आरोपी नाबालिग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। जयलक्ष्मी ने सरकार और पुलिस से आरोपी का पासपोर्ट तथा दूसरे दस्तावेज जब्त करने की मांग भी की। परिवार को आशंका है कि आरोपी प्रभावशाली परिवार से होने के कारण देश छोड़कर जा सकता है। उन्होंने मामले में गंभीर धाराएं लगाने और जांच को प्रभावी बनाने की मांग की है।

परिवार का कहना है कि शुरुआती कार्रवाई में गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी वजह से उन्हें विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। अब हाईकोर्ट की अनुमति के बाद पिता के खिलाफ भी मामला दर्ज करने का रास्ता खुल गया है।

30 साल से पत्नी के साथ चला रहे थे खाने का स्टॉल

जयबालकृष्णन पिछले करीब 30 साल से अपनी पत्नी मंजू (HADSA) के साथ सड़क किनारे शाकाहारी खाने का स्टॉल चलाते थे। रिपोर्ट के अनुसार, वे चित्तूर मंदिर के पास दुकान लगाते थे। रोज शाम करीब 4 बजे स्टॉल खोलते और देर रात उसे बंद करके घर लौटते थे।

जयबालकृष्णन और उनकी पत्नी रोज स्कूटी से करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करके दुकान पहुंचते थे। हादसे के समय वह अकेले घर लौट रहे थे। उनकी पत्नी वैरिकोज वेन्स के इलाज के कारण करीब एक सप्ताह की छुट्टी पर थीं।

परिवार के लिए यह हादसा बड़ा नुकसान है। तीन दशक तक मेहनत करके दुकान चलाने वाले जयबालकृष्णन रोज की तरह काम खत्म कर घर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे में उनकी जान चली गई।

विधानसभा में उठा मामला, गृह मंत्री ने मानी पुलिस की चूक

मामला केरल विधानसभा में भी उठा। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सोमवार को माना कि पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में चूक हुई थी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ही गैर-इरादतन हत्या समेत उचित धाराओं पर विचार किया जाना चाहिए था।

मंत्री के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) ने मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद केस में संबंधित धारा जोड़ी गई। उन्होंने नाबालिग को मिली जमानत रद्द कराने के लिए भी पुलिस को निर्देश दिए।

अब मामले में हाईकोर्ट की अनुमति के बाद नाबालिग के पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला है। पुलिस की जांच, अदालत में पेश की जाने वाली रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए किसकी क्या जिम्मेदारी बनती है। फिलहाल मृतक का परिवार आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा है।

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