विदेशी घोषित महिला को बिना जानकारी बांग्लादेश भेजा, पति को मिलेगा 2 लाख मुआवजा; हाई कोर्ट ने सरकार को दिया आदेश

गुवाहाटी। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में असम सरकार को विदेशी घोषित की गई महिला के पति को 2 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट (High Court order) ने कहा कि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने और देश से बाहर भेजने से पहले उसे संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले की जानकारी और उसकी निशुल्क कॉपी उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वह कानूनी तरीके से फैसले को चुनौती दे सके।
यह आदेश 3 सितंबर 2026 को जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस सुष्मिता फुकन खाउंड की बेंच ने पारित किया। मामला मुमताज बेगम से जुड़ा है, जिन्हें फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था। बाद में उन्हें हिरासत में लेकर बांग्लादेश भेज दिया गया। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों की कार्रवाई और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
2019 में ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था
मामले के मुताबिक, साल 2019 में जुरिया स्थित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, चौथी नागांव ने मुमताज बेगम को विदेशी घोषित किया था। इस फैसले को उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने बाद में ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।
इसके बाद ट्रिब्यूनल ने दोबारा कार्यवाही की। हालांकि, हाई कोर्ट के मुताबिक ऐसा कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि मुमताज बेगम या उनके किसी बालिग पारिवारिक सदस्य को नए फैसले की जानकारी दी गई थी।
कोर्ट ने कहा कि मुमताज को ट्रिब्यूनल के नए फैसले के बारे में बताया जाना जरूरी था, क्योंकि उन्हें उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने का कानूनी अधिकार था।
ट्रिब्यूनल में पेश होने के बाद हिरासत में लिया
मुमताज बेगम 30 मई 2026 को अपने वकील के साथ फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (High Court order) के सामने पेश हुई थीं। उनके पति के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें उसी दिन दोपहर करीब 1 बजे ट्रिब्यूनल परिसर के पास से हिरासत में लिया।
पहले उन्हें जुरिया पुलिस स्टेशन ले जाया गया और इसके बाद नागांव ले जाया गया। वहां से मुमताज को गोलपारा के मटिया स्थित होल्डिंग सेंटर भेज दिया गया। बाद में उन्हें श्रीभूमि स्थानांतरित कर दिया गया।
मुमताज के पति का आरोप था कि उन्हें न तो पत्नी की हिरासत की पर्याप्त जानकारी दी गई और न ही ट्रिब्यूनल के नए फैसले की कॉपी उपलब्ध कराई गई।
सर्टिफाइड कॉपी के लिए पति ने किया आवेदन
मुमताज के पति ने 2 जून को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले की सर्टिफाइड कॉपी हासिल करने के लिए आवेदन किया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब परिवार ने फैसले की कॉपी मांगी तो उसे तत्काल क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया।
कोर्ट के मुताबिक कॉपी 4 जून को तैयार हुई और 5 जून को दी गई। उस समय तक मुमताज को मटिया से श्रीभूमि स्थानांतरित किया जा चुका था।
हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश की जानकारी देने और उसकी कॉपी उपलब्ध कराने में हुई देरी ने मुमताज को अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने से वास्तविक रूप से वंचित कर दिया।
13 जून को BSF को सौंपा, अगले दिन बांग्लादेश भेजा
मुमताज बेगम को 13 जून 2026 को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को सौंप दिया गया। इसके अगले दिन यानी 14 जून की सुबह उन्हें बांग्लादेश भेज दिया गया।
हाई कोर्ट ने कहा कि हिरासत और स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें फैसले को चुनौती देने का प्रभावी अवसर नहीं मिला। कोर्ट ने इस बात को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना कि मुमताज ट्रिब्यूनल के सामने खुद पेश हुई थीं। ऐसे में उन्हें नए फैसले के बारे में जानकारी देना मुश्किल नहीं था।
विदेश मंत्रालय को मुमताज को वापस लाने का निर्देश
हाई कोर्ट ने मामले में विदेश मंत्रालय को मुमताज बेगम (High Court order) का पता लगाने और उन्हें वापस भारत लाने के प्रयास करने का निर्देश भी दिया है।
कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ विदेशी घोषित किए जाने की कार्रवाई के बाद भी कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। संबंधित व्यक्ति को फैसले की जानकारी और उसे चुनौती देने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
हिरासत से पहले मुफ्त कॉपी देने का निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा कि विदेशी घोषित किए गए लोगों को हिरासत में लेने से पहले संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की राय या आदेश की नि:शुल्क प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति को यह पता हो कि उसे किस आधार पर विदेशी घोषित किया गया है और वह कानूनी उपचार के लिए उचित कदम उठा सके।
हाई कोर्ट ने इस मामले में प्रक्रिया संबंधी चूक को गंभीरता से लेते हुए मुमताज बेगम के पति को 2 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला विदेशी घोषित किए गए लोगों के कानूनी अधिकारों और उन्हें फैसले के खिलाफ अपील या चुनौती का वास्तविक अवसर देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



