अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा तनाव: ईरान ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों और टैंकरों पर बोला हमला

तेहरान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान (US and Iran) के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कई जहाजों को निशाना बनाने का दावा किया है।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने फारस की खाड़ी में 10 जहाजों पर हमला किया। इनमें दो अमेरिकी जहाज भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे करीब 10 अन्य जहाजों को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया है। जॉर्डन ने बताया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 20 में से 18 मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया। शुरुआती जानकारी में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान का जवाब
तनाव बढ़ने की शुरुआत अमेरिकी कार्रवाई से हुई। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने पहले अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया।
अमेरिकी नौसेना ने दावा किया कि उसके युद्धपोत ईरानी मिसाइल (US and Iran) हमलों से सुरक्षित बच गए। इसके बाद ईरान की ओर से फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई।
इस घटनाक्रम ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। यहां सैन्य तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
ईरान पहले ही दे चुका था हमले की चेतावनी
ईरान ने हाल के दिनों में अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। सोमवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने नई बैलिस्टिक मिसाइल ‘कासिम बशीर’ को लेकर कई दावे किए थे। मीडिया रिपोर्टों में इसे ईरान की सैन्य क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के तौर पर पेश किया गया।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने दावा किया था कि इस मिसाइल का परीक्षण अमेरिकी युद्धपोत को ध्यान में रखकर किया गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जिस हथियार का परीक्षण हुआ, वह वास्तव में ‘कासिम बशीर’ ही था या कोई अन्य मिसाइल।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस मिसाइल की रेंज कम से कम 1,200 किलोमीटर है। इसे पिछले साल पेश किया गया था। तेहरान ने संकेत दिया था कि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में वह अपनी मिसाइल और नौसैनिक क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका-ईरान आमने-सामने
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा टकराव होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी दिखाई दे रहा है। ईरान चाहता है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाज उसके बताए गए रास्ते का इस्तेमाल करें। वहीं अमेरिका ने ईरान की इस मांग को स्वीकार नहीं किया है।
व्हाइट हाउस ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास एक्सक्लूजन जोन बनाने की ईरानी योजना को खारिज कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग खुला रहेगा और वहां जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, उसकी नौसेना ने स्ट्रेट से बारूदी सुरंगें हटाने का काम किया है। अमेरिका का दावा है कि इसके बाद ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों की ओर जाने वाले टैंकरों की आवाजाही बढ़ सकती है।
94 कमर्शियल जहाजों का बदला गया रास्ता
अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों की जारी नाकेबंदी (US and Iran) के कारण करीब 94 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। अमेरिका का दावा है कि तीन जहाजों को पूरी तरह बेकार कर दिया गया है।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को उसकी तय व्यवस्था के मुताबिक ही आगे बढ़ना होगा। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बढ़ती तनातनी के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है।
बढ़ सकती है तेल आपूर्ति को लेकर चिंता
फारस की खाड़ी में अमेरिकी और ईरानी सैन्य गतिविधियां बढ़ने से वैश्विक बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका है। होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। ऐसे में यदि यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है, तो तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे की कार्रवाई को जवाबी कदम बता रहे हैं। जहाजों पर हमले, मिसाइल हमले और समुद्री मार्ग को लेकर जारी टकराव ने मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों का अगला कदम यह तय करेगा कि स्थिति बातचीत की ओर जाती है या संघर्ष और ज्यादा फैलता है।



