कोरोना काल में TET परीक्षा नहीं हुई तो अनुकंपा नियुक्ति से नहीं होगी वंचित, हाईकोर्ट ने रद्द किया विभाग का आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि यदि कोरोना महामारी के दौरान शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) निर्धारित समय पर आयोजित नहीं हो सकी, तो अभ्यर्थी को तीन साल की समय-सीमा के आधार पर अपात्र नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने धमतरी जिले के हसदा निवासी 35 वर्षीय तोमिन साहू की याचिका स्वीकार करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्ति का आवेदन खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 50 दिनों के भीतर तोमिन साहू के अनुकंपा नियुक्ति आवेदन पर महामारी की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से निर्णय लें।
2018 में पति की सेवा के दौरान हुई थी मौत
मामले के अनुसार, तोमिन साहू के पति दिलीप कुमार साहू की 24 मई 2018 को सेवा में रहते हुए मृत्यु हो गई थी। अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवश्यक शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यता निर्धारित अवधि में हासिल करना जरूरी था।
तोमिन साहू ने वर्ष 2020 में डीएड की पढ़ाई पूरी कर ली थी और इसके बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के लिए आवेदन किया। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020-21 में परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी।
बाद में TET परीक्षा आयोजित होने पर उन्होंने 20 अक्टूबर 2022 को परीक्षा उत्तीर्ण कर ली।
तीन साल में योग्यता पूरी नहीं करने का दिया था हवाला
स्कूल शिक्षा विभाग ने तीन साल की निर्धारित अवधि में आवश्यक योग्यता हासिल नहीं करने का हवाला देते हुए 28 जून 2021 को अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद जिला पंचायत ने भी 20 अप्रैल 2023 के आदेश के जरिए उन्हें राहत नहीं दी।
इसके खिलाफ तोमिन साहू ने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट ने कहा- अभ्यर्थी के नियंत्रण से बाहर थी स्थिति
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि नियमों में निर्धारित समय-सीमा का पालन करना जरूरी है, लेकिन ऐसी परिस्थिति में इसका कठोरता से पालन नहीं किया जा सकता, जब आवश्यक परीक्षा ही अभ्यर्थी के नियंत्रण से बाहर किसी कारण के चलते निर्धारित समय पर आयोजित न हो पाई हो।
कोर्ट ने समान परिस्थितियों में दी गई राहत का भी उल्लेख किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग और जिला पंचायत के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया और कहा कि आवेदन पर कोविड महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से विचार किया जाए।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को 50 दिनों के भीतर मामले में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।



