ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका? ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के इस्तेमाल की चर्चा तेज

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हुई हैं। इसी बीच अमेरिकी सेना की संभावित सैन्य योजनाओं में ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ यानी MOAB के इस्तेमाल की चर्चा सामने आई है। यह अमेरिका के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बमों में से एक है। हालांकि, ईरान के खिलाफ इसके इस्तेमाल को लेकर अभी अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोबारा सैन्य कार्रवाई का आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना तैयार की गई योजनाओं पर आगे बढ़ सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका है।
ईरान की चेतावनी के बीच बढ़ी सैन्य कार्रवाई की चर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अली आजमाई ने अमेरिकी जहाजों को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी जहाजों की किसी भी गतिविधि का जवाब दिया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सेना की संभावित योजनाओं में शक्तिशाली बम के इस्तेमाल की चर्चा ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, संभावित योजना और वास्तविक सैन्य कार्रवाई के आदेश में अंतर है। फिलहाल बम के इस्तेमाल को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
क्या है ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’?
इस बम का आधिकारिक नाम GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) है। इसे आम तौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। यह परमाणु बम नहीं है, लेकिन इसका विस्फोट बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है।
इसका इस्तेमाल बड़े सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह बम करीब 20 फीट लंबा है। इसकी विनाशकारी क्षमता के कारण इसे अमेरिका के सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में गिना जाता है।
युद्ध बढ़ने पर तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यदि अमेरिका ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करता है, तो इसका असर दोनों देशों तक सीमित रहने की आशंका नहीं होगी। मध्य पूर्व के दूसरे देशों में भी तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है।
क्षेत्र में तेल और गैस से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, संभावित हमले और उसके आर्थिक प्रभावों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।



