मेघालय हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट सख्त
सोनम रघुवंशी से कहा- सरेंडर करो, नहीं तो जमानत हो सकती है रद्द

नई दिल्ली। चर्चित मेघालय हनीमून मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने कहा कि या तो वह मुख्य गवाहों के बयान पूरे होने तक सरेंडर करें, या फिर कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने पर मेरिट के आधार पर फैसला सुनाएगी। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
जमानत पर उठाए गंभीर सवाल
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील से कहा कि उनके पास दो विकल्प हैं। पहला, अदालत जमानत पर मेरिट के आधार पर फैसला सुनाए। दूसरा, सोनम फिलहाल सरेंडर कर दें और मुख्य गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद जमानत पर दोबारा विचार किया जाए। अदालत ने इसे बेहतर विकल्प भी बताया।
‘टाइपिंग मिस्टेक‘ पर कैसे मिली जमानत?
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या सिर्फ दस्तावेजों में हुई टाइपिंग की गलती के आधार पर इतने गंभीर मामले में जमानत दी जा सकती है।
दरअसल, गिरफ्तारी के दस्तावेजों में हत्या की धारा 103(1) की जगह गलती से 403(1) लिख दिया गया था। इसी आधार पर निचली अदालत ने जमानत दी थी।
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह सिर्फ एक लिपिकीय त्रुटि थी। आरोपी को अपनी गिरफ्तारी और आरोपों की पूरी जानकारी थी, इसलिए सिर्फ इस गलती को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
मई 2025 में इंदौर के नवविवाहित दंपति राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी हनीमून मनाने मेघालय गए थे। कुछ दिनों बाद दोनों लापता हो गए। बाद में राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से मिला, जबकि सोनम कई दिनों बाद उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास मिली।
जांच में मेघालय पुलिस ने दावा किया कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। पुलिस के अनुसार, सोनम रघुवंशी और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा इस साजिश के मुख्य आरोपी हैं। इसके बाद दोनों समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
23 जुलाई पर टिकी नजर
अब सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को 23 जुलाई तक अपना फैसला बताने का समय दिया है। यदि वह सरेंडर करती हैं, तो अदालत ट्रायल कोर्ट को मुख्य गवाहों की गवाही जल्द पूरी कराने का निर्देश दे सकती है। इसके बाद उनकी जमानत पर दोबारा विचार किया जाएगा। वहीं, अगर सरेंडर नहीं किया जाता, तो सुप्रीम कोर्ट जमानत रद्द करने पर फैसला सुना सकती है।

