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NEET-UG पुनर्परीक्षा शांतिपूर्ण संपन्न, 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी हुए शामिल

पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित NEET-UG पुनर्परीक्षा रविवार को देशभर में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, देश के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी सहित कुल 13 भाषाओं में आयोजित की गई।

NTA ने कहा कि यह केवल एजेंसी का प्रयास नहीं, बल्कि “टीम इंडिया” की सामूहिक भावना का परिणाम था। एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि परीक्षा संचालन के लिए करीब 7 लाख अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, पर्यवेक्षकों और कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए 51 हजार से अधिक जैमर लगाए गए और बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन तथा सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं।

बिहार में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़

परीक्षा के दौरान बिहार के लखीसराय में एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने 7 सॉल्वर समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाकर परीक्षा दिलाने के लिए लाखों रुपये की डील की गई थी। मामले में मेडिकल छात्र अर्पित राज का नाम भी सामने आया है, जिसका संबंध पहले के पेपर लीक मामलों से भी जुड़ चुका है।

कई जगह छात्रों को हुई परेशानी

कुछ परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को देर से पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं मिल सका। भोपाल और बेंगलुरु में ऐसे कई मामले सामने आए। वहीं कोलकाता में भारी बारिश और जलभराव के बावजूद परीक्षा आयोजित की गई। एक घायल छात्रा के लिए अलग कक्ष, चिकित्सा सहायता और एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई।

मुंबई में परिवहन कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए विशेष बस सेवाएं चलाई गईं, जबकि गुजरात में परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया गया।

प्रधानमंत्री ने भी दिखाई संवेदनशीलता

परीक्षा के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली एयरपोर्ट पर कुछ समय तक रुके रहे ताकि उनके काफिले के कारण ट्रैफिक प्रभावित न हो और परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे छात्रों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

फिजिक्स रहा सबसे कठिन

अधिकांश छात्रों के अनुसार इस बार का प्रश्नपत्र पिछली परीक्षा की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। फिजिक्स का सेक्शन सबसे कठिन और समय लेने वाला बताया गया, जबकि बायोलॉजी अपेक्षाकृत आसान रही। अभ्यर्थियों का मानना है कि कठिन पेपर के कारण इस बार कट-ऑफ कम रह सकती है।

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