
दिल्ली। देश के करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए केंद्र सरकार ने नई Employees’ Provident Fund (EPF) Scheme, 2026 लागू कर दी है।
यह योजना 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है और लंबे समय से लागू पुरानी EPF व्यवस्था की जगह लेगी। नई स्कीम का उद्देश्य EPF सिस्टम को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाना है। इसमें पिछले दो वर्षों के दौरान EPFO द्वारा किए गए विभिन्न सुधारों को एकीकृत किया गया है।
नई योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव नॉमिनेशन प्रक्रिया में किया गया है। अब खाताधारकों के लिए परिवार या नामित व्यक्ति का विवरण अपडेट करना पहले की तुलना में अधिक आसान और स्पष्ट होगा। इससे किसी कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में दावों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।
सरकार ने पीएफ निकासी की प्रक्रिया को बनाया आसान
सरकार ने PF निकासी की प्रक्रिया भी सरल बनाई है। नए नियमों के तहत क्लेम प्रक्रिया (EPF) को आसान और तेज किया गया है, जिससे कर्मचारियों को जरूरत पड़ने पर अपने भविष्य निधि का पैसा कम समय में मिल सकेगा। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने से अनावश्यक दस्तावेजी औपचारिकताएं भी कम होंगी।
नई EPF स्कीम में कंपनियों के लिए अनुपालन (कॉम्प्लायंस) संबंधी नियम भी सख्त किए गए हैं। नियोक्ताओं को अब EPF नियमों का अधिक जिम्मेदारी के साथ पालन करना होगा। पहली बार ठेकेदारों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों से जुड़े प्रावधानों को भी व्यवस्थित किया गया है, ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रहें और कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना आसान हो।
इन नियमों में बदलाव नहीं
हालांकि, कुछ अहम प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं का 12-12 प्रतिशत PF अंशदान पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं 15 हजार रुपए की वैधानिक वेतन सीमा भी यथावत रखी गई है।
सरकार का कहना है कि नई EPF Scheme, 2026 से कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी, जबकि कंपनियों को भी अपनी HR और PF प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप अपडेट करना होगा।

