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फिलहाल सस्ता नहीं होगा पेट्रोल-डीजल! 1 लाख करोड़ की अंडर-रिकवरी से तेल कंपनियों पर दबाव

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद आम लोगों को फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद कम है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पहले पश्चिम एशिया के तनाव के दौरान हुए भारी नुकसान की भरपाई करना चाहती हैं, इसलिए जल्द कीमतें घटाने की संभावना नहीं है।

जानकारों के मुताबिक, मार्च से मई 2026 के बीच पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर तेल कंपनियों को करीब 1 लाख करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी हुई। मई में यह नुकसान एक समय 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह घटकर 500-600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया।

एलपीजी पर भी कंपनियों का दबाव बढ़ा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, फरवरी से जून 2026 के बीच अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में 46 फीसदी की वृद्धि हुई। दिल्ली में मई 2026 के दौरान घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर प्रति सिलेंडर 651 रुपये तक की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। मार्च-मई 2026 के दौरान केवल एलपीजी पर ही कंपनियों को करीब 22,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी और कई देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल किया। अब वे फिर से स्टॉक बढ़ाने की तैयारी में हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

S&P ग्लोबल एनर्जी के अनुमान के मुताबिक, 2026 की दूसरी छमाही में कच्चे तेल की कीमतें 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। वहीं, ICRA का मानना है कि वैश्विक सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने और तेल बाजार के संतुलन में लौटने में दो तिमाही से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है।

ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं होता और वैश्विक बाजार स्थिर नहीं होता, तब तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना कम है।

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