दिल्ली में बैरिकेडिंग हटाने और इंटरनेट बहाल करने का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और हिरासत से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। सरकार को मंगलवार, 13 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो सेवाओं का संचालन अचानक बंद नहीं किया जाना चाहिए और आम लोगों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए। साथ ही दिल्ली में लगाए गए बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट पर अदालत की सख्ती
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी मेट्रो स्टेशन लोगों की जरूरत के अनुसार खुले रहने चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा है। न्यायमूर्ति बागची ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या 45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया गया था।
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जिन मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया था, वहां यह व्यवस्था सीमित समय के लिए की गई थी। उनके अनुसार, शनिवार रात 10 बजे से सभी मेट्रो स्टेशन खुले थे। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के मामले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
प्रदर्शनकारियों और वकीलों के साथ व्यवहार पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से खड़े होने और प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। कुछ वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और कथित मारपीट से जुड़े वीडियो भी अदालत के सामने रखे।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत की घटनाएं गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों को जंतर-मंतर के निर्धारित क्षेत्र से बाहर भी हिरासत में लिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे वकीलों को पुलिस ने घेर लिया और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि दिल्ली की सीमाओं और गुरुग्राम सहित अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत मामले की गंभीरता समझती है और लोगों के जीवन तथा स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर विस्तार से सुनवाई करेगी।
सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार अपनी कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी हलफनामे के जरिए पेश करेगी। उन्होंने कहा कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए अदालत के निर्देशों के अनुरूप कदम उठाए गए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके नाम पर नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अदालत ने इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और मेट्रो का नियमित संचालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित मामले में नई याचिकाओं पर सोमवार को विचार किया जाएगा। न्यायमूर्ति बागची ने भरोसा दिलाया कि लोगों के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों की पूरी सुनवाई के बाद उचित आदेश दिया जाएगा।



