एआई एजेंट्स की निगरानी के लिए परप्लेक्सिटी ने लॉन्च किया नंबैट, संदिग्ध गतिविधियों का लगाएगा पता

एआई एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। इसी बीच परप्लेक्सिटी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने ‘नंबैट’ नाम का ओपन-सोर्स टूल पेश किया है। इसे एआई एजेंट्स की गतिविधियों पर नजर रखने, संदिग्ध व्यवहार का पता लगाने और सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की जांच में मदद करने के लिए तैयार किया गया है।
रोग एआई एजेंट्स से बढ़ा सुरक्षा का खतरा
अरविंद श्रीनिवास के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे मामलों ने चिंता बढ़ाई है, जिनमें रोग एआई एजेंट्स सैंडबॉक्स से बाहर निकलकर थर्ड पार्टी वेबसाइट्स या सिस्टम्स पर हमला करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में एजेंट्स के संभावित नुकसानदेह इरादों की पहचान और उनकी गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है। नंबैट को इसी चुनौती से निपटने के लिए तैयार किया गया है।
कंपनी के अनुसार, एआई एजेंट्स और एमसीपी सर्वर्स के पास कई बार व्यापक सिस्टम एक्सेस होता है, लेकिन उनकी गतिविधियों को लगातार ट्रैक करना मुश्किल होता है। नंबैट इस समस्या को कम करने के लिए एजेंट्स की गतिविधियों की विजिबिलिटी बढ़ाने पर काम करता है।
एजेंट की गतिविधियों की तैयार होगी पूरी टाइमलाइन
नंबैट सपोर्टेड डेस्कटॉप, कमांड-लाइन, आईडीई और गेटवे आधारित एआई एजेंट्स के साथ काम कर सकता है। यह लोकल हुक्स और प्लगइन्स के जरिए गतिविधियों की जानकारी जुटाता है। इसके अलावा ओटीएलपी/एचटीटीपी लॉग्स और लोकल सेशन फाइल्स से भी डेटा रिकॉर्ड किया जाता है।
टूल एजेंट की गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार करने में मदद करता है। इससे सुरक्षा विशेषज्ञ यह समझ सकते हैं कि किसी खास एआई सेशन के दौरान क्या-क्या हुआ। उदाहरण के लिए, यदि कोई एजेंट नेटवर्क स्कैनिंग जैसी गतिविधि करता है, तो नंबैट उसे फ्लैग कर सकता है और सिक्योरिटी फाइंडिंग के तौर पर रिकॉर्ड कर सकता है।
डेटा चोरी और प्रिविलेज एस्केलेशन जैसी गतिविधियां भी होंगी डिटेक्ट
नंबैट में कई तरह की संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए डिटेक्शन रूल्स दिए गए हैं। इनमें सीक्रेट्स की चोरी, डेटा एक्सफिल्ट्रेशन, कमांड या कोड एक्जीक्यूशन, रिकॉनिसेंस, प्रिविलेज एस्केलेशन, लेटरल मूवमेंट, पर्सिस्टेंस और सिस्टम में छेड़छाड़ जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
यह टूल गो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का इस्तेमाल करके बनाया गया है और मैकओएस, लिनक्स तथा विंडोज पर काम करता है। इसे स्टैंडअलोन बाइनरी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या गो के जरिए इंस्टॉल किया जा सकता है। इसे बड़े एंटरप्राइज सिस्टम्स में भी तैनात करने की सुविधा दी गई है। मैनेज्ड कॉन्फिगरेशन और एमडीएम सिस्टम्स के जरिए डिप्लॉयमेंट का विकल्प भी मौजूद है।



