सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: कोर्ट की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर डालने से पहले लेनी होगी अनुमति, छत्तीसगढ़ HC भी दायरे में

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Order) ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारण को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है।
कोर्ट ने बिना पूर्व अनुमति न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित, अपलोड, पोस्ट, री-पोस्ट, मॉनेटाइज या संग्रहित करने पर रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और उसकी रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
बिना अनुमति रिकॉर्डिंग शेयर या अपलोड नहीं कर सकेंगे
अंतरिम आदेश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Order) की न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या किसी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करने के लिए पूर्व अनुमति जरूरी होगी। रिकॉर्डिंग को प्रसारित, अपलोड, ट्रांसमिट, संशोधित, स्टोर या होस्ट करने पर भी यह प्रतिबंध लागू रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से यह अनुमति सेक्रेटरी जनरल से लेनी होगी। वहीं संबंधित हाईकोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के मामले में अनुमति उस हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से लेनी होगी।
इसका मतलब यह है कि कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने मात्र से कोई व्यक्ति उसे अपनी सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, वेबसाइट, यूट्यूब चैनल या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।
कई हाईकोर्ट को बनाया गया प्रतिवादी
याचिका में देश के विभिन्न हाईकोर्ट को भी पक्षकार बनाए जाने का आग्रह किया गया था। सुनवाई के दौरान मौखिक उल्लेख के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कई हाईकोर्ट को प्रतिवादी बनाया।
इनमें आंध्र प्रदेश, इलाहाबाद, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट समेत अन्य हाईकोर्ट शामिल हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को भी प्रतिवादी क्रमांक 12 के रूप में शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सभी हाईकोर्ट को कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग और न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग से जुड़े मॉडल नियमों के पालन को लेकर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवहारिकता पर भी मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Order) ने हाईकोर्ट से यह भी बताने को कहा है कि उसके द्वारा प्रसारित लाइव स्ट्रीमिंग और कोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग से संबंधित मॉडल नियमों को किस हद तक अपनाया गया है।
इसके साथ ही रिपोर्ट में लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग के प्रभाव और उसकी व्यवहारिकता की जानकारी देने को भी कहा गया है। यानी अदालतें लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था को किस तरह लागू कर रही हैं और लंबे समय तक इसे जारी रखने में किस तरह की व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ रही हैं, इसकी जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखनी होगी।
इससे न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग को लेकर देशभर में एक समान व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सकता है।
24 जुलाई को हुई थी याचिका पर सुनवाई
यह अंतरिम व्यवस्था 24 जुलाई 2026 को हर्षिता ग्रोवर की ओर से दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पारित की गई थी। याचिका में न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। आगे की सुनवाई में इस मुद्दे से जुड़े नियमों, रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल और लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था पर विस्तार से विचार किया जा सकता है।
मान्यता प्राप्त मीडिया की रिपोर्टिंग पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यानी अधिकृत और मान्यता प्राप्त समाचार माध्यम पहले की तरह अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकेंगे। कोर्ट की कार्यवाही से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने पर यह अंतरिम रोक लागू नहीं होगी।
हालांकि, रिकॉर्ड की गई ऑडियो-वीडियो सामग्री को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित अनुमति प्रक्रिया का पालन करना होगा।
डिजिटल दौर में रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल पर बड़ा सवाल
कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और आम लोगों को महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई से अवगत कराना है। लेकिन रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल, संपादन और अलग संदर्भ में प्रसारित किए जाने से जुड़े सवाल भी लगातार सामने आते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से अब न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल को लेकर अनुमति और जिम्मेदारी का दायरा अधिक स्पष्ट हुआ है। संबंधित हाईकोर्ट से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट और आगे होने वाली सुनवाई के बाद इस व्यवस्था को लेकर और स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आने की संभावना है।



