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उमर अब्दुल्ला सरकार पर सियासी संकट के बादल, 20 विधायकों के इस्तीफे से बदल सकता है बहुमत का गणित

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर जारी राजनीतिक असंतोष ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कैबिनेट विस्तार के बाद नाराज चल रहे पार्टी के करीब 18 विधायक जल्द ही पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं, करीब 20 विधायकों के इस्तीफा देने की चर्चा ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। हालांकि, फिलहाल सरकार के पास बहुमत से अधिक विधायकों का समर्थन है।

कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी

नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष की मुख्य वजह 27 अक्टूबर को हुआ कैबिनेट विस्तार बताया जा रहा है। इस विस्तार में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था। इसके बाद मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई, जो निर्धारित अधिकतम सीमा है। इसके बावजूद पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं। इनमें छह बार के विधायक मुबारक गुल का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

नाराज विधायकों की मांग केवल मंत्री पद तक सीमित नहीं है। वे मंत्रिमंडल में बदलाव के साथ दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके मंत्रियों को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाने और पार्टी संगठन में बदलाव की मांग भी उठाई गई है।

फारूक और उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की तैयारी

नाराज विधायकों के बीच अब तक चार दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया है। विधायकों ने कैसर लोन, नजीर गुरेजी, फारूक शाह और पूर्व सांसद हसनैन मसूदी के आवास पर बैठकें की हैं।

अब करीब 18 विधायक श्रीनगर के गुपकार स्थित फारूक अब्दुल्ला के आवास पर उनसे और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में नाराजगी दूर करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, सरकार को समर्थन दे रहे नाराज निर्दलीय विधायकों को इस बैठक में शामिल नहीं किया गया है।

विधानसभा में क्या है बहुमत का गणित?

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा स्थिति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 41, कांग्रेस के छह, निर्दलीय छह और सीपीआईएम का एक विधायक है। इस तरह उमर अब्दुल्ला सरकार को कुल 54 विधायकों का समर्थन हासिल है।

वहीं, विपक्ष में भाजपा के 29, पीडीपी के चार, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का एक, आम आदमी पार्टी का एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं। मौजूदा संख्या के हिसाब से उमर सरकार बहुमत के आंकड़े से काफी आगे है।

20 विधायकों ने इस्तीफा दिया तो क्या होगा?

अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस के 20 विधायक इस्तीफा देते हैं और विधानसभा अध्यक्ष उनके इस्तीफे स्वीकार कर लेते हैं, तो सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 90 से घटकर 70 रह जाएगी। ऐसी स्थिति में बहुमत का आंकड़ा भी घटकर 36 हो जाएगा।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 विधायकों में से 20 के इस्तीफे के बाद पार्टी के पास 21 विधायक बचेंगे। कांग्रेस के छह, निर्दलीय छह और सीपीआईएम के एक विधायक को मिलाकर सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या 34 रह जाएगी। यानी सरकार बहुमत के आंकड़े से दो सीट पीछे हो सकती है। यदि समर्थन दे रहा कोई निर्दलीय विधायक भी साथ छोड़ देता है, तो यह संख्या और कम हो जाएगी।

दलबदल कानून भी बन सकता है बड़ी बाधा

नाराज विधायकों के पास इस्तीफे के अलावा पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने का विकल्प भी है, लेकिन इसमें दलबदल कानून की बाधा आ सकती है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून लागू है।

इस कानून के मुताबिक, यदि कोई विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी के व्हिप के खिलाफ मतदान करता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है। पार्टी के विलय के लिए विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41 विधायकों के मामले में यह संख्या 28 बनती है। ऐसे में 20 विधायकों का समूह विलय की शर्त पूरी नहीं कर पाएगा।

फिलहाल सरकार की स्थिरता काफी हद तक नाराज विधायकों और निर्दलीय सदस्यों के रुख पर निर्भर करती है। फारूक और उमर अब्दुल्ला की आगामी बैठक को इसी लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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Mahi Rajput

Content Writer (News) – 2.5 Years of Experience- Experienced in writing and editing news articles for digital news portals. - Skilled in writing breaking news, feature stories, and informative web content. - Strong fact-checking, research, and editing skills. - Able to meet daily publishing deadlines and produce high-quality content consistently.Social Media Management – 6 Months of Experience- Managed social media accounts and scheduled content. - Created engaging captions and post copies. - Planned and maintained content calendars. - Monitored audience engagement and responded to queries. - Coordinated with the content team to ensure consistent brand communication.

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