ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों पर सियासत तेज: कांग्रेस ने सरकार पर जानकारी छिपाने का लगाया आरोप, रक्षा मंत्रालय ने किया खंडन

दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के छह शहीद जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज होने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर शहीदों की जानकारी एक साल तक सार्वजनिक नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए एक पुराने बयान का वीडियो साझा करते हुए कहा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए जवानों की जानकारी छिपाई। उन्होंने सवाल उठाया कि या तो रक्षा मंत्री को शहादत की जानकारी नहीं थी या फिर संसद को गुमराह किया गया। खेड़ा ने कहा कि शहीदों को समय पर वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।
विवाद बढ़ने के बाद रक्षा मंत्रालय (Operation Sindoor) ने स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि यह दावा गलत है कि छह शहीदों को पहली बार अब सार्वजनिक सम्मान मिला है। मंत्रालय के अनुसार 11 मई 2025 को तत्कालीन डीजीएमओ ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। इसके अलावा 14 अगस्त 2025 को वीरता पुरस्कारों की घोषणा, सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट, 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना सम्मान समारोह और 15 जनवरी 2026 को सेना दिवस परेड में भी शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया जा चुका है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (Operation Sindoor) पर नाम दर्ज करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसके तहत सभी शहीदों के नाम जोड़े जाते हैं। साथ ही, राजनाथ सिंह का संसद में दिया गया बयान भारतीय वायुसेना के विमानों और पायलटों को लेकर किए गए दावों के संदर्भ में था, न कि ऑपरेशन में हुई सभी सैन्य क्षति के संबंध में। सरकार ने कहा कि शहीदों के परिवारों को सभी निर्धारित सुविधाएं और सम्मान समय पर उपलब्ध कराए गए हैं।

