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सहकारी समिति प्रबंधक के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, 20 साल की नौकरी में आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप 

दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार जिले में लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति (RAID) के मामले में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, नालछा के प्रबंधक शेरसिंह ठाकुर के ठिकानों पर छापा मारा। बुधवार तड़के इंदौर लोकायुक्त की तीन टीमों ने सोडपुर, नालछा और मांडव में एक साथ कार्रवाई की।

शुरुआती जांच में करीब 20 साल की नौकरी के दौरान प्रबंधक के वेतन से कई गुना अधिक संपत्ति जुटाने का मामला सामने आया है। लोकायुक्त के मुताबिक, उनकी कुल वैध वेतन आय करीब 65 लाख रुपए है, जबकि संपत्ति और वाहनों पर 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपए से अधिक का खर्च और निवेश मिला है। इसे आय से 271 प्रतिशत से अधिक अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है।

तलाशी के दौरान आलीशान दो मंजिला मकान, व्यावसायिक भवन, कृषि भूमि, जेसीबी, ट्रैक्टर, कार और अन्य कृषि उपकरणों की जानकारी मिली है। लोकायुक्त की टीमें अब बैंक खातों, लॉकर और जमीन के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

तीन ठिकानों पर एक साथ पहुंचीं लोकायुक्त की टीमें

लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश और एसपी राजेश सहाय (RAID)  के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। इसके लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं। टीमों ने धार जिले के ग्राम सोडपुर, नालछा और मांडव स्थित ठिकानों पर एक साथ दबिश दी।

कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी आनंद चौहान, टीआई आशुतोष मिठास, प्रतिभा तोमर और सचिन पटेरिया कर रहे हैं। तलाशी के दौरान संपत्तियों के दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और वाहनों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि प्रबंधक ने अपनी ज्ञात आय के मुकाबले इतनी अधिक संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की।

65 लाख रुपए वेतन, संपत्ति और निवेश 2.41 करोड़ से ज्यादा

लोकायुक्त की शुरुआती जांच के अनुसार, शेरसिंह ठाकुर का सेवाकाल करीब 20 साल का है। इस अवधि में वेतन के रूप में उन्हें लगभग 65 लाख रुपए मिले। इसके मुकाबले संपत्तियों और वाहनों पर उनका खर्च और निवेश 2 करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपए से अधिक पाया गया है।

लोकायुक्त ने इसे ज्ञात आय से 271 प्रतिशत से ज्यादा अनुपातहीन संपत्ति बताया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि संपत्तियां किस आय या वित्तीय स्रोत से खरीदी गईं। इसके लिए बैंक खातों के लेन-देन, जमीन की रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

सोडपुर में 97 लाख रुपए का दो मंजिला मकान

लोकायुक्त की तलाशी में ग्राम सोडपुर में करीब 2400 वर्गफीट क्षेत्रफल में बना दो मंजिला मकान मिला है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 97 लाख रुपए बताई गई है। इसके अलावा नालछा में मांडव रोड तिराहे पर करीब 1350 वर्गफीट का व्यावसायिक भवन भी सामने आया है। इसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपए आंकी गई है।

जांच में कृषि भूमि का भी पता चला है। ग्राम मांडव में पत्नी के नाम पर 2.526 हेक्टेयर जमीन मिली है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 42 लाख रुपए बताई गई है। वहीं सोडपुर में 0.645 हेक्टेयर कृषि भूमि भी मिली है। इसकी कीमत लगभग 8 लाख रुपए आंकी गई है।

इन संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त यह भी पता लगा रही है कि जमीन और भवन खरीदने के लिए रकम कहां से आई थी और इनका वास्तविक बाजार मूल्य कितना है।

जेसीबी, ट्रैक्टर, कार और बुलेट भी मिली

तलाशी के दौरान शेरसिंह ठाकुर के पास कई वाहन और कृषि उपकरण होने की जानकारी सामने आई है। इनमें जेसीबी, महिंद्रा ट्रैक्टर, महिंद्रा टीयूवी, आल्टो कार और बुलेट शामिल हैं। इसके अलावा आधुनिक कृषि यंत्र भी मिले हैं। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 53 लाख रुपए बताई गई है।

टीम वाहनों के रजिस्ट्रेशन और खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के स्वामित्व का भी सत्यापन किया जा रहा है। जांच में यह देखा जाएगा कि वाहन सीधे प्रबंधक के नाम पर हैं या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से खरीदे गए हैं।

बैंक लॉकर और खातों की भी होगी जांच

लोकायुक्त अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी (RAID)  के दौरान कुछ अन्य संपत्तियों और निवेश से जुड़े सुराग भी मिले हैं। टीम बैंक खातों और लॉकर की जानकारी जुटा रही है।

जमीन के मूल दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संपत्ति का कुल आंकड़ा ढाई करोड़ रुपए से ऊपर जा सकता है। हालांकि, इसका अंतिम आकलन दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही होगा।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

शेरसिंह ठाकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त की टीमें आय और संपत्ति के बीच अंतर का हिसाब जुटा रही हैं। इसमें परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों और बैंक लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।

फिलहाल तीनों ठिकानों पर तलाशी और दस्तावेजों की जांच जारी है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि अब तक सामने आई संपत्तियों में से कितनी अनुपातहीन आय के दायरे में आती हैं और इस मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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