रायपुर एम्स में पार्किंग कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप, मां के सामने मरीज को पीटा; पुलिस ने दर्ज की FIR

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज कराने आए एक युवक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि पार्किंग में बाइक हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद कर्मचारियों ने युवक के साथ उसकी मां के सामने मारपीट की। पीड़ित की शिकायत पर आमानाका पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद एम्स परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इलाज कराने आए युवक से मारपीट का आरोप
मिली जानकारी के मुताबिक, कबीर नगर निवासी विवेक कुर्रे एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनकी तबीयत खराब होने के कारण वे गुरुवार को अपनी मां के साथ इलाज कराने रायपुर एम्स पहुंचे थे। इलाज कराने के बाद जब वे अपनी मां के साथ परिसर से बाहर जा रहे थे, तभी पार्किंग में बाइक हटाने को लेकर विवाद हो गया।
आरोप है कि पार्किंग कर्मचारी आयुष शर्मा ने अपनी बाइक रास्ते में खड़ी कर रखी थी। विवेक ने बाइक हटाने के लिए कहा तो कर्मचारी कथित तौर पर गाली-गलौज करने लगा। जब युवक ने गाली देने का विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया।
साथी कर्मचारियों को बुलाकर मारपीट करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, विवाद बढ़ने पर पार्किंग कर्मचारी आयुष शर्मा ने अपने साथियों शरद लाल, विकास और अन्य लोगों को बुला लिया। इसके बाद सभी ने मिलकर विवेक कुर्रे के साथ मारपीट की।
बताया गया कि युवक की मां मौके पर मौजूद थीं और उन्होंने बीच-बचाव करने की कोशिश की। हालांकि, आरोप है कि इसके बावजूद मारपीट नहीं रुकी। घटना के बाद आरोपी मौके से चले गए।
युवक पहले से बीमार था और इलाज कराने के लिए अस्पताल आया था। ऐसे में उसके साथ हुई कथित मारपीट ने अस्पताल परिसर में मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, मामले में आरोपियों का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
आमानाका पुलिस ने दर्ज की FIR
घटना के बाद पीड़ित विवेक कुर्रे ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर आमानाका थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। मामले में आरोपियों की भूमिका और घटना की परिस्थितियों का निर्धारण जांच के बाद ही होगा।
एम्स परिसर में पार्किंग कर्मचारियों के व्यवहार पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एम्स परिसर में पार्किंग व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खबर में यह भी आरोप लगाया गया है कि पार्किंग कर्मचारियों के खिलाफ मरीजों और उनके परिजनों से दुर्व्यवहार, कथित अवैध वसूली और नशाखोरी जैसी शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएं और परिसर में अनुशासन बनाए रखें।
एम्स जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई मरीज गंभीर स्थिति में होते हैं और उनके साथ परिवार के सदस्य भी रहते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में सुरक्षित आवागमन, व्यवस्थित पार्किंग और कर्मचारियों का जिम्मेदार व्यवहार बेहद जरूरी है।
मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
रायपुर एम्स में सामने आया यह मामला अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और पार्किंग प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। यदि पार्किंग को लेकर विवाद होता है, तो उसे नियमों के अनुसार शांतिपूर्वक सुलझाया जाना चाहिए। किसी मरीज या उसके परिजन के साथ मारपीट का आरोप गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और एम्स प्रबंधन पार्किंग कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर क्या कदम उठाता है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना किसी भी स्वास्थ्य संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है।



