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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT रिपोर्ट के बाद FIR की मांग तेज, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी रूप से गरमा गया है। रिपोर्ट के बाद अब एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है और जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिना एफआईआर के एसआईटी के पास जांच का वैधानिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो सकती है और तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।

सपा सांसद राजीव राय ने भी आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज नहीं होने से बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

एसआईटी ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट

राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 7 जून को लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने 23 जून को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।

सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में ट्रस्ट के पुनर्गठन और आगे की कार्रवाई के लिए एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच कराने का सुझाव दिया गया है।

एफआईआर की मांग क्यों हो रही है?

मामले में अब तक सामने आए आरोपों में चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में अनियमितताओं की बात कही जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी आपराधिक कृत्य की जांच करनी है और दोषियों के खिलाफ अदालत में कार्रवाई करनी है, तो एफआईआर दर्ज होना आवश्यक माना जाता है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद ही जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाकर अदालत में आरोप पत्र पेश कर सकती हैं और दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई संभव होती है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विराग गुप्ता के अनुसार, आपराधिक मामलों में एफआईआर अपराध का पहला आधिकारिक रिकॉर्ड होती है। उन्होंने कहा कि यदि चढ़ावे के दुरुपयोग या चोरी के आरोपों की जांच करनी है तो प्रक्रियाबद्ध जांच के लिए एफआईआर आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि दंड प्रक्रिया कानून में एसआईटी का अलग से उल्लेख नहीं है। आमतौर पर पहले एफआईआर दर्ज की जाती है और उसके बाद किसी विशेष मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

चढ़ावा विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच के बाद ही होगा, लेकिन मामले से जुड़ी खबरों ने उन लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया है जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन और निर्माण से जुड़कर लंबे समय तक संघर्ष किया था।

आगे क्या?

अब सभी की नजर उत्तर प्रदेश सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर है। यदि एफआईआर दर्ज होती है तो मामले की जांच का दायरा और कानूनी प्रक्रिया दोनों व्यापक हो जाएंगे। वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार क्या निर्णय लेती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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