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राम मंदिर चढ़ावा मामला: क्या अनुच्छेद 26 चंपत राय को गिरफ्तारी से बचाता है? जानिए संविधान क्या कहता है

राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी की जांच के आधार पर कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जा चुकी है। वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर या गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा है कि संविधान का अनुच्छेद 26 उन्हें कानूनी संरक्षण देता है। हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यह दावा पूरी तरह सही नहीं है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों और धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने, धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाएं स्थापित करने, संपत्ति रखने तथा उसका प्रबंधन करने का अधिकार देता है। यह अनुच्छेद संस्थागत अधिकारों से जुड़ा है, न कि किसी व्यक्ति विशेष को आपराधिक मामलों में छूट देने से।

अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक ट्रस्ट अपने आंतरिक प्रशासन और धार्मिक मामलों का संचालन कर सकते हैं। राज्य केवल सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ किसी आपराधिक कृत्य के पर्याप्त साक्ष्य हों, तो उसके खिलाफ सामान्य कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की जा सकती है और गिरफ्तारी भी संभव है। संविधान का अनुच्छेद 26 किसी व्यक्ति को आपराधिक कार्रवाई से प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) प्रदान नहीं करता।

चंपत राय के मामले में अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ किसी वित्तीय अनियमितता या आपराधिक कृत्य के प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन पर मुख्य रूप से प्रबंधन में कथित लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में ट्रस्ट के आंतरिक नियम और उसके निर्णय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जबकि आपराधिक कार्रवाई का आधार केवल जांच एजेंसियों को मिले साक्ष्य होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट भी विभिन्न मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि धार्मिक ट्रस्ट स्वायत्त संस्थाएं हैं और राज्य उनके प्रशासन पर स्थायी नियंत्रण नहीं कर सकता। हालांकि, यदि कानून के उल्लंघन या वित्तीय अनियमितताओं के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो जांच और कानूनी कार्रवाई सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा सकती है।

इसलिए, यह कहना सही नहीं होगा कि अनुच्छेद 26 अपने आप में किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी या एफआईआर से बचाता है। यह अनुच्छेद धार्मिक संस्थाओं के प्रशासनिक अधिकारों की रक्षा करता है, जबकि किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों के आधार पर किया जाता है।

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