राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस की FIR पर उठे सवाल, अधूरी जानकारी और जांच की पारदर्शिता पर चर्चा

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज एफआईआर अब नए विवादों में घिरती नजर आ रही है। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब एफआईआर में दर्ज जानकारी और जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि एफआईआर में जिन कर्मचारियों को नामजद किया गया है, उनके पिता का नाम और पूरा पता दर्ज नहीं किया गया। जबकि सभी आरोपी लंबे समय से मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं। इसे लेकर एफआईआर की सटीकता और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू हो गई है।
एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामले में किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत के संकेत मिले हैं। हालांकि, अभी तक किसी बैंक अधिकारी को नामजद नहीं किया गया है और उन्हें अज्ञात आरोपी के रूप में रखा गया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी को अज्ञात बताया गया है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि एफआईआर के लिए दी गई तहरीर बेहद संक्षिप्त रखी गई है और इसमें एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर ही गबन का आरोप दर्ज किया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि तहरीर में इस्तेमाल किए गए शब्द तय प्रारूप के अनुसार लिखे गए थे।
जानकारी के मुताबिक, एसआईटी के गठन से पहले ट्रस्ट स्तर पर संदिग्ध कर्मचारियों से पूछताछ की गई थी, जिसके आधार पर करीब 3 करोड़ रुपये की कथित बरामदगी हुई। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ कथित गबन की रकम की रिकवरी भी बढ़ सकती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस व एसआईटी की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

