पति की मौत के बाद जिंदा महिला को भी मृत मान लिया, राशन कार्ड बंद; मोहम्मद अकबर ने सरकार को घेरा

रायपुर। पति की मौत के बाद एक महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया। इसका असर यह हुआ कि उसका अंत्योदय राशन कार्ड ( Ration Card) निरस्त हो गया और उसे सरकारी राशन मिलना बंद हो गया। रायपुर के सुभाष नगर की रहने वाली साकरा बानो के इस मामले को पूर्व खाद्य मंत्री और कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने उठाया है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने, जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने और महिला का राशन कार्ड बहाल करने की मांग की है।
मोहम्मद अकबर ने इस मामले में वीडियो जारी कर महिला की समस्या सामने रखी। वीडियो में साकरा बानो राशन कार्ड से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए अपनी परेशानी बता रही हैं। महिला के पति मोईनुद्दीन का निधन हो चुका है। अकबर के मुताबिक, महिला जीवित है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत दर्ज कर दिया गया। इसके बाद उसका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त हो गया।
अकबर ने इसे महज रिकॉर्ड में हुई गलती मानने के बजाय खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले के रूप में उठाया। उनका कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में गलत जानकारी दर्ज होने का खामियाजा किसी जरूरतमंद परिवार को नहीं भुगतना चाहिए। राशन कार्ड के जरिए मिलने वाला खाद्यान्न गरीब परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किसी पात्र व्यक्ति का कार्ड गलत तरीके से निरस्त होने पर उसके सामने भोजन की व्यवस्था का संकट खड़ा हो सकता है।

दो साल में 1.17 लाख से ज्यादा कार्ड निरस्त
साकरा बानो का मामला उठाने के साथ ही मोहम्मद अकबर ने प्रदेश में राशन कार्ड निरस्तीकरण के आंकड़ों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024 के दौरान 57,371 राशन कार्ड निरस्त किए गए, जबकि वर्ष 2025 में 60,496 कार्ड रद्द हुए। इस तरह दो साल में कुल 1,17,867 राशन कार्ड निरस्त किए गए।
अकबर ने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में राशन कार्ड निरस्त करने से पहले क्या प्रत्येक मामले की सही तरीके से जांच की गई थी? क्या कार्डधारकों को इसकी जानकारी दी गई और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिला? उन्होंने मांग की कि सरकार इन सवालों का जवाब दे और निरस्तीकरण की प्रक्रिया की समीक्षा कराए।
उनका कहना है कि साकरा बानो का मामला सामने आने के बाद यह जांच करना जरूरी हो गया है कि कहीं दूसरे पात्र लोगों के राशन कार्ड भी सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होने के कारण तो निरस्त नहीं किए गए। उन्होंने सभी निरस्त कार्डों की समीक्षा कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने की मांग की है।
प्रदेश में 83.33 लाख राशन कार्ड
पूर्व खाद्य मंत्री ने विभागीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल 83.33 लाख राशन कार्ड ( Ration Card) संचालित हैं। इनमें 274.04 लाख सदस्य पंजीकृत हैं। वर्ष 2025 की अनुमानित 3.08 करोड़ आबादी के आधार पर प्रदेश के करीब 89 प्रतिशत लोगों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ पहुंच रहा है।
अकबर ने कहा कि खाद्य सुरक्षा योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को राशन उपलब्ध कराना है। इसलिए कार्ड बनाने और निरस्त करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। किसी व्यक्ति की मृत्यु, परिवार की स्थिति या अन्य जानकारी से संबंधित रिकॉर्ड में गलती होने पर उसका असर सीधे संबंधित परिवार के राशन पर पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि राशन कार्ड निरस्त करने से पहले दस्तावेजों और संबंधित जानकारी की जांच की जाए। यदि किसी पात्र व्यक्ति का कार्ड गलत जानकारी के आधार पर निरस्त हुआ है, तो उसे बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
खाद्य मंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग
मोहम्मद अकबर ने खाद्य मंत्री से साकरा बानो के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गलती के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। साथ ही महिला का अंत्योदय राशन कार्ड दोबारा चालू किया जाए, ताकि उसे राशन मिल सके।
उन्होंने पिछले दो वर्षों में निरस्त किए गए सभी राशन कार्डों ( Ration Card) की समीक्षा करने की मांग भी दोहराई। इस समीक्षा में यह पता लगाया जाना चाहिए कि कितने कार्ड नियमों के तहत निरस्त किए गए और कहीं किसी पात्र परिवार का कार्ड गलत रिकॉर्ड के कारण तो बंद नहीं हुआ।
अकबर के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में पात्र लोगों को लाभ मिलना सुनिश्चित करना जरूरी है। सरकारी रिकॉर्ड में त्रुटि होने पर उसका सुधार समय पर किया जाना चाहिए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को परेशानी न उठानी पड़े।
फिलहाल साकरा बानो के मामले में जांच और राशन कार्ड बहाली की मांग उठाई गई है। इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से कार्रवाई या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी सामने आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



