Follow Us on Our Social Media
National

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान को भेजा न्योता, नवंबर में दिल्ली आएंगे SCO देश

दिल्ली। भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने और विभिन्न देशों के बीच संवाद को मजबूत करने के लिए पहली बार ‘सभ्यता संवाद मंच’ आयोजित करने जा रहा है।

20 से 22 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में होने वाले इस कार्यक्रम के लिए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सभी 10 सदस्य देशों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पाकिस्तान भी शामिल है। पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद पाकिस्तान को निमंत्रण भेजे जाने को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस आयोजन का उद्देश्य SCO सदस्य देशों की प्राचीन सभ्यताओं, साझा ऐतिहासिक विरासत, साहित्य, कला और परंपराओं को एक मंच पर लाना है। इसके जरिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने और देशों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, SCO सदस्य देशों के अलावा संवाद साझेदारों और पर्यवेक्षक देशों को मिलाकर 25 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।

पाकिस्तान के संस्कृति मंत्री को भी निमंत्रण

भारत ने पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान समेत SCO के सभी सदस्य देशों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को भी आमंत्रित किया गया है।

हालांकि, पाकिस्तान की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होगा या नहीं। यह भी तय नहीं है कि पाकिस्तान की तरफ से कौन प्रतिनिधित्व करेगा और क्या संबंधित मंत्री स्वयं भारत आएंगे।

भारत की ओर से यह पहल ऐसे समय में की गई है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव बना हुआ है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इसके बाद दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हो गए थे।

ऐसे माहौल में पाकिस्तान को निमंत्रण भेजना चर्चा का विषय है। हालांकि, इस आमंत्रण को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। यह आयोजन SCO के बहुपक्षीय ढांचे के तहत हो रहा है, जिसमें भारत सदस्य देश के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।

PM मोदी ने SCO सम्मेलन में दिया था प्रस्ताव

सभ्यता संवाद मंच की शुरुआत का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान रखा था। इसका मकसद संगठन के सहयोग को राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी विषयों से आगे बढ़ाकर सांस्कृतिक क्षेत्र तक विस्तार देना था।

इसके बाद इस पहल को आगे बढ़ाया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित SCO शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक के दौरान घोषणा की थी कि भारत वर्ष के अंत तक पहले सभ्यता संवाद मंच की मेजबानी करेगा।

इस मंच के जरिए भारत सदस्य देशों के बीच साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करना चाहता है। अलग-अलग देशों की सभ्यताओं, परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों को समझने से आपसी संवाद के नए अवसर बन सकते हैं। आयोजन में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, कला, साहित्य और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना है।

पुराने किले में हो सकता है आयोजन

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली का ऐतिहासिक पुराना किला इस कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किए जाने की भी संभावना जताई गई है। हालांकि, आयोजन स्थल और कार्यक्रम के अंतिम स्वरूप की औपचारिक पुष्टि होना बाकी है।

पुराना किला भारतीय इतिहास और स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहां विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का एकत्र होना कार्यक्रम के सांस्कृतिक उद्देश्य को विशेष महत्व दे सकता है। भारत को अपनी ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। वहीं, दूसरे देशों के प्रतिनिधि भी अपनी सभ्यताओं और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी जानकारी साझा कर सकेंगे।

इस तरह के आयोजनों से पर्यटन, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं भी बनती हैं।

SCO में सुरक्षा से लेकर संस्कृति तक सहयोग पर जोर

शंघाई सहयोग संगठन एशिया और यूरेशिया के प्रमुख देशों को साझा मंच उपलब्ध कराता है। संगठन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, आर्थिक संपर्क और स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा होती रही है। सभ्यता संवाद मंच के जरिए सांस्कृतिक सहयोग को भी इस दायरे में अधिक महत्व देने की कोशिश की जा रही है।

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी SCO के मंच पर संपर्क देखने को मिला है। मई 2023 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने गोवा आए थे। अक्टूबर 2024 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर SCO बैठक में भाग लेने इस्लामाबाद गए थे।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि द्विपक्षीय तनाव के बावजूद बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों की भागीदारी संभव रही है। हालांकि, ऐसे मंचों पर मौजूदगी का अर्थ यह नहीं है कि विवादित मुद्दों पर दोनों देशों के मतभेद खत्म हो गए हैं।

सांस्कृतिक संवाद से विश्वास बढ़ाने की कोशिश

सभ्यता संवाद मंच का महत्व इस बात में है कि इसमें देशों के बीच सहयोग को केवल रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय साझा सांस्कृतिक विरासत के जरिए भी आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। भारत के लिए यह पहल अपनी सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के साथ क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद का अवसर भी है।

पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आयोजन का वास्तविक कूटनीतिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने देश इसमें शामिल होते हैं और संवाद के दौरान किन मुद्दों पर सहमति बनती है। फिलहाल, सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजकर भारत ने सांस्कृतिक सहयोग को SCO के एजेंडे में प्रमुखता देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

Follow Us on Our Social Media

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button