हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा बोले- अब कवि सम्मेलन में कविता ही गायब हो गई है

नई दिल्ली। प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने टीवी9 भारतवर्ष के विशेष पॉडकास्ट ‘ना काहूं से बैर’ में बातचीत के दौरान पुराने कवि सम्मेलनों के सुनहरे दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि पहले मंचों पर बेहतरीन कवि और समझदार श्रोता होते थे, जबकि आज के समय में कवि सम्मेलनों का स्वरूप काफी बदल गया है।
पहले के कवि सम्मेलन थे अलग
सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि पहले के कवि सम्मेलनों में कविता की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती थी। उस दौर में शैल चतुर्वेदी, काका हाथरसी और शरद जोशी जैसे दिग्गज मंचों की शान हुआ करते थे।
उन्होंने कहा कि पहले कार्यक्रम रातभर चलते थे और श्रोता भी पूरे उत्साह के साथ जुड़े रहते थे। उनके मुताबिक, समय के साथ मंचों की चमक तो बढ़ी है, लेकिन कविता का स्तर कमजोर हुआ है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के कई कवि सम्मेलनों में “सब कुछ है, लेकिन कविता ही गायब हो गई है।”
युवाओं से प्रतिस्पर्धा पर क्या बोले?
आज के लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियनों और युवा कलाकारों से तुलना के सवाल पर सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि उन्हें किसी तरह की प्रतिस्पर्धा महसूस नहीं होती। उनका मानना है कि हर दौर के अपने कलाकार और अपनी शैली होती है।
उन्होंने कहा कि लोकप्रियता और कमाई की तुलना साहित्यिक गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब वे कई बड़े कवियों से अधिक पारिश्रमिक लेते थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी साहित्यिक ऊंचाई उनसे अधिक थी।
फिल्मों और स्टैंड-अप कॉमेडी से बनाई दूरी
सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने पिछले करीब 25 वर्षों से कोई फिल्म नहीं देखी है। उनका कहना है कि आज के कई स्टैंड-अप कॉमेडी कार्यक्रमों में अनावश्यक भाषा और गालियों का प्रयोग बढ़ गया है, इसलिए वे ऐसे कंटेंट से दूरी बनाए रखते हैं।

