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तीस्ता परियोजना में चीन की एंट्री से बढ़ी भारत की चिंता, जल विवाद बना रणनीतिक चुनौती

भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चल रहा तीस्ता नदी जल बंटवारा विवाद अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। बांग्लादेश ने तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TRCMRP) में चीन को शामिल किया है, जिससे यह मुद्दा अब केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं रह गया है।

बांग्लादेश का कहना है कि उसे तीस्ता नदी में पानी की कमी, बाढ़ और नदी कटाव जैसी समस्याओं से राहत के लिए इस परियोजना की जरूरत है। इसके लिए उसने चीन से करीब 72.5 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता मांगी है। मार्च 2025 में चीन यात्रा के दौरान बांग्लादेश ने इस परियोजना में चीन की भागीदारी का औपचारिक स्वागत भी किया था।

वहीं भारत इस परियोजना को सुरक्षा के नजरिए से देख रहा है। परियोजना का क्षेत्र भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के काफी करीब है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला अहम गलियारा है। भारत को आशंका है कि यहां चीनी इंजीनियरों और तकनीकी टीमों की लंबी मौजूदगी सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकती है।

तीस्ता नदी के पानी को लेकर दोनों देशों के बीच कई वर्षों से विवाद बना हुआ है। बांग्लादेश का आरोप है कि सूखे के मौसम में उसे जरूरत के मुकाबले काफी कम पानी मिलता है। साल 2011 में जल बंटवारे का समझौता होने वाला था, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण यह लागू नहीं हो सका।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती भागीदारी के बाद तीस्ता परियोजना अब केवल जल प्रबंधन का मुद्दा नहीं रही। आने वाले समय में यह भारत, बांग्लादेश और चीन के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संतुलन का महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

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