
महासमुंद। जिले के भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामने आए कथित नकल प्रकरण ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। परीक्षा केंद्र में एक छात्रा द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन और उसके बाद मीडिया में प्रकाशित खबरों को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट(High Court) ने इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने राज्य शासन के स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर पूरे मामले में शपथपत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आरोपित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पर माँगा जवाब
हाईकोर्ट(High Court) की डिवीजन बेंच ने यह भी पूछा है कि मीडिया रिपोर्ट्स में जिन शिक्षकों के नाम नकल कराने के आरोपों के साथ सामने आए हैं, उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी सरकार को शपथपत्र के माध्यम से देनी होगी। शिक्षा विभाग की ओर से अदालत को बताया गया है कि विभागीय जांच तीन महीने के भीतर पूरी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में निर्धारित है।
छात्रा ने रिकॉर्ड किया था नकल का वीडियो
पूरा मामला बसना ब्लॉक के रोहिणी गांव की रहने वाली छात्रा नीता जगत से जुड़ा है। नीता सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा हैं और उनका परीक्षा केंद्र भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय बनाया गया था। परीक्षा के दौरान उन्होंने कथित तौर पर देखा कि कुछ शिक्षक छात्रों को उत्तर लिखवाने में मदद कर रहे हैं और परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन का भी इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद उन्होंने कथित अनियमितताओं का वीडियो रिकॉर्ड कर सबूत जुटाया।
वीडियो वायरल के बाद बोर्ड परीक्षाओं की निष्पक्षता पर उठे सवाल
यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और स्थानीय मीडिया ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। मामला सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और बोर्ड परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होने लगे। इसी क्रम में यह मामला हाईकोर्ट(High Court) तक पहुंचा, जहां अदालत ने मीडिया में प्रकाशित तथ्यों को आधार बनाकर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रा ने जब कथित गड़बड़ियों का विरोध किया तो उसे सहयोग मिलने के बजाय फटकार का सामना करना पड़ा। उसने आरोप लगाया कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इतना ही नहीं, अंग्रेजी की परीक्षा के दौरान उसकी डेस्क पर पहले से लिखावट कर उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया गया। लगातार दबाव के कारण उसकी तबीयत भी बिगड़ गई, लेकिन उसने शिकायत दर्ज कराने का फैसला नहीं बदला।
जिला स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने के बाद नीता जगत रायपुर स्थित माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) कार्यालय पहुंचीं और पूरे मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रकरण ने व्यापक चर्चा का रूप लिया और अब हाईकोर्ट की निगरानी में इसकी सुनवाई आगे बढ़ रही है।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच और उसके परिणाम पर है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला केवल एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि बोर्ड परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

