2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए 8-9% की रफ्तार से बढ़ानी होगी अर्थव्यवस्था, जानें क्या है लक्ष्य

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले दो दशकों तक हर साल 8 से 9 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखनी होगी। सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार आर्थिक सुधार और जरूरी नीतिगत कदम उठाने होंगे। भारत का लक्ष्य अपनी मौजूदा लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को 2047 तक बढ़ाकर 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है।
देश की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो उम्मीदों से बेहतर रही। हालांकि, विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबे समय तक तेज विकास दर बनाए रखना जरूरी होगा।
अगले 20 साल भारत के लिए अहम
सौरभ गर्ग ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में भी अपनी मजबूत विकास गति बनाए रखने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक, अगले 20 साल देश के आर्थिक विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, विश्व बैंक ने भी अपने अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है। इन अनुमानों के पीछे घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों को अहम वजह माना गया है।
जीडीपी की गणना में शामिल होंगे नए पहलू
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गर्ग ने बताया कि सरकार आर्थिक गतिविधियों को मापने के मौजूदा तरीकों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। इसके तहत राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के नए ढांचे में तीन महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल करने की योजना है।
इनमें डेटा को एक आर्थिक संपत्ति के रूप में देखना, प्राकृतिक संसाधनों में कमी का आकलन करना और लोगों की खुशहाली एवं जीवन स्तर को मापना शामिल है। इन पहलुओं के आकलन के लिए अगले दो से तीन वर्षों तक काम किए जाने की उम्मीद है। लक्ष्य है कि वर्ष 2029-30 तक इन्हें लागू करने की दिशा में प्रगति की जाए।
विकसित भारत के लिए केवल जीडीपी बढ़ना काफी नहीं
संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग की ओर से अनुमोदित राष्ट्रीय लेखा प्रणाली के नए ढांचे को मार्च 2025 में अपनाया गया था। उम्मीद है कि विभिन्न देश 2029-30 के आसपास इसे लागू करना शुरू करेंगे।
सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के अध्यक्ष और वरिष्ठ फेलो लवीश भंडारी ने कहा कि जीडीपी आर्थिक प्रदर्शन मापने का महत्वपूर्ण पैमाना है, लेकिन मानवीय प्रगति का आकलन केवल इससे नहीं किया जा सकता।
उनके मुताबिक, विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए लोगों की खुशी, स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। इसका मतलब है कि आर्थिक विकास के साथ आम लोगों के जीवन में सुधार लाना भी भारत के विकास के लक्ष्य का अहम हिस्सा होना चाहिए।



