तीजन बाई को श्रद्धांजलि, लेकिन परिवार को नहीं मिली एंट्री!
दशगात्र कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

दुर्ग। पद्मविभूषण और विश्वप्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के दशगात्र एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एक ओर जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम के दौरान एक विवाद भी सामने आ गया। वीआईपी सुरक्षा और भारी भीड़ के चलते कथित तौर पर तीजन बाई के कुछ परिजनों को कार्यक्रम स्थल में प्रवेश नहीं मिल सका। इस पर उनके पोते समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने नाराजगी जताई और अपनी पीड़ा साझा की।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब
दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, लोक कलाकार, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। सभी ने डॉ. तीजन बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और पंडवानी कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
परिवार ने जताई नाराजगी
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ के कारण कुछ पारिवारिक सदस्यों तथा स्थानीय लोगों को प्रवेश नहीं मिलने की बात सामने आई। तीजन बाई के पोते ने आरोप लगाया कि परिवार के सदस्यों को भी अंदर जाने में परेशानी हुई, जिससे वे काफी आहत हुए।
परिजनों का कहना है कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम परिवार के लिए भावनात्मक अवसर था, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने याद किया तीजन बाई का योगदान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पंडवानी शैली से छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनका जीवन और कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाने में तीजन बाई का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
सुरक्षा और ट्रैफिक के रहे विशेष इंतजाम
मुख्यमंत्री के दौरे और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस और यातायात विभाग ने कार्यक्रम स्थल पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की थी। गनियारी मार्ग पर ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी बनाए गए, ताकि वीआईपी मूवमेंट और आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।
हालांकि, इसी सुरक्षा व्यवस्था के चलते कुछ लोगों और परिजनों को प्रवेश में दिक्कत होने की बात सामने आई।
विधानसभा में भी दी गई थी श्रद्धांजलि
डॉ. तीजन बाई के निधन के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई थी। सदन के सभी सदस्यों ने पंडवानी और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए उनके निधन को राज्य की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया था।
डॉ. तीजन बाई ने अपनी विशिष्ट पंडवानी शैली से छत्तीसगढ़ की लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण रही कि वे केवल एक महान लोक कलाकार ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की सबसे मजबूत प्रतीकों में से एक थीं। वहीं, कार्यक्रम के दौरान परिजनों को हुई कथित असुविधा ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए।

