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तुर्की को अमेरिकी जेट इंजन की मंजूरी, 700 मिलियन डॉलर की डील पर मचा सियासी बवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को 700 मिलियन डॉलर (करीब 5,800 करोड़ रुपये) के जेट इंजन बेचने की मंजूरी दे दी है। यह सौदा तुर्की के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के KAAN फाइटर जेट प्रोजेक्ट और उसकी वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के कारण अमेरिका में इस डील का विरोध भी तेज हो गया है।

इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) तुर्की को एडवांस जेट इंजन उपलब्ध कराएगी। अमेरिकी विदेश विभाग ने कांग्रेस को भेजे नोटिफिकेशन में कहा है कि राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और मानवाधिकार संबंधी पहलुओं पर विचार करने के बाद इस निर्यात को मंजूरी देने का फैसला लिया गया है।

राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार लंबे समय से तुर्की को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से 2016 में KAAN फाइटर जेट परियोजना शुरू की गई थी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अत्याधुनिक इंजन के बिना यह परियोजना आगे बढ़ना मुश्किल है।

इस डील की टाइमिंग भी चर्चा में है, क्योंकि अगले महीने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन होना है। इसे अमेरिका और तुर्की के बीच संबंधों को मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, अमेरिकी सांसदों का एक वर्ग इस फैसले का विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि 2019 में रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के बाद तुर्की पर लगे प्रतिबंध अभी भी लागू हैं। इसी वजह से उसे F-35 फाइटर जेट कार्यक्रम से बाहर किया गया था। विरोधी नेताओं का तर्क है कि जब तक तुर्की S-400 सिस्टम अपने पास रखेगा, तब तक उसे उन्नत सैन्य तकनीक देना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा होगा।

अमेरिकी कानून के तहत कांग्रेस के पास इस रक्षा सौदे को रोकने के लिए 15 दिन का समय है। हालांकि, यदि कांग्रेस विरोध प्रस्ताव पारित भी कर देती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास उसे वीटो करने का अधिकार होगा।

इस बीच, इजराइल भी इस सौदे को लेकर चिंतित है। उसका मानना है कि तुर्की की बढ़ती सैन्य क्षमता से मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। वहीं, तुर्की और पाकिस्तान के बीच KAAN फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन को लेकर भी सहमति बन चुकी है, जिससे पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट तकनीक तक पहुंच मिलने की संभावना बढ़ गई है।

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