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मानसून की कमी से जल संकट गहराया, देश के 54 बड़े जलाशयों में सामान्य से 80% कम पानी

देश में मानसून के दौरान अपेक्षित बारिश नहीं होने का असर अब जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में से 54 में जल भंडारण सामान्य स्तर के 80 प्रतिशत से भी कम रह गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 15 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे कई राज्यों में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।

आंकड़ों के अनुसार, देश के 166 बड़े जलाशयों में इस समय कुल 70.43 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी मौजूद है, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 38.37 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में 110.52 बीसीएम पानी था। यानी इस बार जल भंडारण पिछले साल की तुलना में लगभग 36 प्रतिशत कम है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 54 जलाशयों में पानी सामान्य स्तर के 80 प्रतिशत से नीचे है, जबकि इनमें से 22 जलाशयों में सामान्य क्षमता के आधे से भी कम पानी बचा है। प्रभावित प्रमुख जलाशयों में श्रीशैलम, नागार्जुन सागर, तुंगभद्रा, कृष्णराज सागर, पेरियार और तवा जैसे महत्वपूर्ण जलाशय शामिल हैं।

दक्षिण भारत में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। इस क्षेत्र के 47 प्रमुख जलाशयों में फिलहाल केवल 30 प्रतिशत पानी भरा है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह स्तर 69 प्रतिशत था। सामान्य स्थिति में यह 44 प्रतिशत होना चाहिए। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के जलाशयों में जल स्तर काफी नीचे पहुंच गया है। तेलंगाना में हालात सबसे अधिक गंभीर हैं, जहां जल भंडारण सामान्य स्तर से 57 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।

हालांकि, मुंबई के लिए राहत की खबर है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले सातों प्रमुख जलाशयों में लगातार हो रही बारिश के कारण जल स्तर तेजी से बढ़ा है। इन जलाशयों में कुल उपयोगी जल भंडार बढ़कर 86.18 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मुंबई की जलापूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत भातसा जलाशय भी 85.07 प्रतिशत भर चुका है, जबकि मोडक सागर, विहार और तुलसी जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहने पर मुंबई के अन्य जलाशय भी जल्द अपनी पूरी क्षमता तक भर सकते हैं।

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