अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला: बोले- 14 पार्टियों की भीड़ जुटाकर देश की आवाज नहीं बन सकते, गांवों तक पहुंचे कांग्रेस

दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ( Amit Shah) ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि 14 राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं को जुटाकर 8 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा करने से कोई देश की आवाज नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि देश की जनता का विश्वास हासिल करने के लिए केवल मीडिया इवेंट और बयानों से काम नहीं चलेगा, बल्कि गांवों, खेत-खलिहानों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना होगा।
अमित शाह ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा कि देश की आवाज केवल शहरों तक सीमित नहीं है। यह खेतों, गांवों, पहाड़ियों, जंगलों और नदियों के किनारे बसे लोगों के बीच भी मौजूद है। शाह के मुताबिक, देश के ऐसे कई हिस्से हैं, जहां कांग्रेस की पहुंच नहीं है।
गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने की मांग को लेकर विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे हैं। राहुल गांधी समेत विपक्षी गठबंधन INDIA के कई नेता इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को घेर रहे हैं।
’14 पार्टियों का कैडर जुटाकर देश की आवाज नहीं बन सकते’
अमित शाह ( Amit Shah) ने विपक्षी दलों के प्रदर्शन और राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 14 पार्टियों के कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करके डेढ़ किलोमीटर के दायरे में 8 हजार लोगों की भीड़ जुटाने से देश की आवाज नहीं बना जा सकता।
शाह ने कहा कि देश की जनता का विश्वास हासिल करने के लिए केवल भीड़ जुटाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए लोगों के बीच जाना और उनकी समस्याओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मीडिया के लिए कार्यक्रम आयोजित करने और बयानों के जरिए जनता का भरोसा हासिल नहीं किया जा सकता।
गृह मंत्री ने कांग्रेस को यह समझने की सलाह दी कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों की आवाज और उनकी समस्याएं राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, केवल कुछ शहरों में होने वाले प्रदर्शनों के आधार पर पूरे देश की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं किया जा सकता।
गांवों, खेतों और दूरदराज के इलाकों में पहुंचे कांग्रेस
अमित शाह ने कांग्रेस को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि देश की आवाज खेत-खलिहानों, गांवों, पहाड़ियों, जंगलों और नदियों के किनारे भी बसती है। कांग्रेस को इन इलाकों में जाकर लोगों से जुड़ना चाहिए।
शाह का कहना था कि देश के कई हिस्सों में कांग्रेस की मौजूदगी और पहुंच कमजोर है। ऐसे में पार्टी को केवल राजनीतिक प्रदर्शनों और मीडिया में दिखाई देने वाले कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उनके बयान का राजनीतिक संदेश यह है कि किसी भी पार्टी के लिए देशव्यापी जनसमर्थन का दावा करने के लिए व्यापक जनसंपर्क और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव जरूरी है। शाह ने कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भीड़ और प्रचार के जरिए देश की जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
बिहार, यूपी और तमिलनाडु का भी किया जिक्र
केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस पर हमला करते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में जनता ने कांग्रेस को लंबे समय तक नकारा है और चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।
शाह ने इन राज्यों का उदाहरण देते हुए कांग्रेस की राजनीतिक स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, चुनावी परिणाम बताते हैं कि केवल विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने या बड़ी भीड़ जुटाने से जनता का समर्थन हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को यह समझना चाहिए कि देश की जनता का भरोसा हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना जरूरी है। हालांकि, यह बयान भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर आमने-सामने सरकार-विपक्ष
अमित शाह ( Amit Shah) का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच आया है। विपक्षी दल इन मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां उठाई हैं। विपक्ष इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग कर रहा है। वहीं, भाजपा की ओर से विपक्ष के विरोध और उसकी राजनीतिक रणनीति पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
ऐसे में अमित शाह की टिप्पणी को कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर भाजपा के राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है। शाह ने अपने बयान में कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की कि देश का प्रतिनिधित्व करने का दावा केवल प्रदर्शनों, भीड़ या मीडिया में चर्चा के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच पहुंच बनाना जरूरी है।
इस बयान से चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर सरकार-विपक्ष के बीच जारी विवाद में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।



