जामिया में ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील’ के नारे लगाने का आरोप, छात्रों के समर्थन में पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद हिरासत में

दिल्ली। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है। कैंपस में कथित तौर पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री शरजील इमाम’ और ‘डेथ टू एबीवीपी’ जैसे नारे लिखे जाने के मामले ने राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच तनाव बढ़ा दिया है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (MP Imran Masood) को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की बहाली, चुनाव की तारीख और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब छात्र लंबे समय से विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने और वर्ष 2006 में भंग किए गए छात्रसंघ को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कथित नारों को लेकर निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
इमरान मसूद बोले- आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद छात्रों के समर्थन में जामिया पहुंचे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मसूद ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और प्रदर्शनकारी छात्र भी इससे इनकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गतिविधियों के जरिए छात्र आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
मसूद के मुताबिक, छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके आंदोलन को दूसरे मुद्दों से जोड़कर पेश नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, कथित नारों को लेकर उठे विवाद ने प्रदर्शन को राजनीतिक रंग दे दिया है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जेल में बंद छात्रों को जमानत देने की मांग की। छात्रों की मांगों और कथित नारों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
ABVP ने की FIR और निष्पक्ष जांच की मांग
जामिया में कथित नारों को लेकर (MP Imran Masood) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विरोध जताया है। संगठन का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान ‘Free Kashmir’ और ‘Death to ABVP’ जैसे नारे लगाए गए। ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
इस विवाद के केंद्र में कैंपस की दीवारों पर कथित तौर पर लिखे गए नारे हैं। इन्हें लेकर छात्र संगठनों के बीच मतभेद सामने आए हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ABVP ने कथित नारों पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मामले में आरोपों और संबंधित पक्षों के दावों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कथित नारे किसने लिखे या लगाए। ऐसे में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
छात्रसंघ चुनाव और बहाली को लेकर प्रदर्शन
जामिया में छात्रों का प्रदर्शन केवल कथित नारों के विवाद तक सीमित नहीं है। छात्र वर्ष 2006 में भंग किए गए छात्रसंघ की बहाली और चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी उठा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की बहाली और चुनाव की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। छात्रसंघ को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध के बीच चुनाव की तारीख घोषित नहीं होने से असंतोष बना हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में गठित हाई लेवल कमेटी ने अपनी प्रक्रिया और सिफारिशों को लेकर जानकारी दी है। कमेटी के मुताबिक, छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए एक ड्राफ्ट कमेटी बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रसंघ की संरचना और उससे संबंधित नियमों को तैयार करना है।
12 अक्टूबर के बाद की कार्रवाई की समीक्षा होगी
विश्वविद्यालय की हाई लेवल कमेटी ने 12 अक्टूबर 2026 के बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करने की बात कही है। इसके अलावा, सुरक्षा कर्मचारियों के लिए आचार संहिता तैयार करने और उन्हें प्रशिक्षण देने की सिफारिश भी की गई है।
इन कदमों के बावजूद छात्रसंघ चुनाव की तारीख अब तक घोषित नहीं हुई है। इस कारण छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। छात्र चुनाव और छात्रसंघ की बहाली को लेकर स्पष्ट समयसीमा चाहते हैं।
कमेटी की सिफारिशों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और चुनाव की प्रक्रिया कब तक पूरी होती है, इस पर छात्रों की नजर बनी हुई है।
राजनीतिक विवाद के बीच जांच पर टिकी नजर
जामिया का यह मामला अब छात्र मांगों के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी (MP Imran Masood) का विषय भी बन गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की हिरासत, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी की जमानत की मांग और ABVP की एफआईआर की मांग ने विवाद को और चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल, पूरे घटनाक्रम में दो प्रमुख मुद्दे सामने हैं। पहला, कैंपस में कथित आपत्तिजनक नारों को लेकर लगाए गए आरोप, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। दूसरा, छात्रसंघ की बहाली और चुनाव की तारीख को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन तथा छात्रों के बीच जारी गतिरोध।
आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां कथित नारों के मामले में क्या कदम उठाती हैं और छात्रसंघ चुनाव को लेकर कोई समयसीमा तय होती है या नहीं।



