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CJP फिनिश! कॉकरोच जनता पार्टी के नेता जेल जाएंगे… सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू का बड़ा दावा

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना उनके लिए माफीनामा देने जैसा है। काटजू के मुताबिक, इस फैसले से पार्टी की राजनीतिक विश्वसनीयता प्रभावित हुई है और अब नेताओं के सामने आंदोलन जारी रखने को लेकर कानूनी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करके पार्टी के नेताओं ने अपना राजनीतिक करियर दांव पर लगा दिया है। उनका दावा है कि जनता अब ऐसे नेताओं पर पहले की तरह भरोसा नहीं करेगी, जिन्होंने आंदोलन जारी रखने के बजाय शांति और अच्छे व्यवहार का बॉन्ड स्वीकार किया है।

काटजू ने अपने बयान में ब्रिटिश शासनकाल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने पीस बॉन्ड की तुलना उस दौर में क्रांतिकारियों से लिखवाए जाने वाले माफीनामों से की। उनके अनुसार, जिस तरह माफीनामा देने वाले क्रांतिकारियों की छवि जनता के बीच प्रभावित होती थी, उसी तरह CJP नेताओं की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।

पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर को माफीनामा देने जैसा बताया

मार्कंडेय काटजू ने CJP नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना उनके लिए माफीनामा देने जैसा है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से नेताओं की आंदोलनकारी छवि को नुकसान पहुंचा है।

काटजू ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल कई क्रांतिकारियों को जेल से रिहा करने के लिए माफीनामा लिखने के लिए कहा जाता था। उनके मुताबिक, जो लोग ऐसा माफीनामा देते थे, उनकी प्रतिष्ठा पर असर पड़ता था। उन्होंने इसी उदाहरण के आधार पर CJP नेताओं के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के फैसले की आलोचना की।

हालांकि, यह काटजू की व्यक्तिगत टिप्पणी और राजनीतिक आकलन है। नेताओं की छवि या उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर उनका दावा कोई स्थापित तथ्य नहीं है।

आंदोलन करने पर कानूनी कार्रवाई का खतरा?

काटजू ने पीस बॉन्ड की शर्तों को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद CJP नेताओं के लिए दोबारा आंदोलन करना आसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि यदि नेता फिर किसी ऐसे प्रदर्शन में शामिल होते हैं, जिसे पुलिस शांति भंग करने की कोशिश मानती है, तो उनके खिलाफ बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन की कार्रवाई हो सकती है।

काटजू के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका पहले भी करीब एक सप्ताह तक जेल में रह चुके हैं। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में बॉन्ड की शर्तों को लेकर विवाद होने पर दोनों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है।

इसी आधार पर काटजू ने कहा कि CJP के नेताओं के सामने अब आंदोलन जारी रखने को लेकर मुश्किलें हैं। उन्होंने पार्टी को लेकर यह भी दावा किया कि उसकी राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक आधार कमजोर हो चुका है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि पीस बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन होने पर क्या कानूनी कार्रवाई होगी, यह संबंधित मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। केवल किसी आंदोलन में शामिल होना अपने आप में बॉन्ड उल्लंघन साबित नहीं करता।

क्या है CJP नेताओं का पीस बॉन्ड विवाद?

दरअसल, यह पूरा मामला अक्टूबर महीने में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया था।

प्रदर्शन के दौरान पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद 11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीनों नेताओं को एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त पर रिहा किया।

रिहाई के लिए प्रत्येक नेता की ओर से 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड जमा किया गया था। इसी बॉन्ड को लेकर बाद में विवाद शुरू हुआ और मार्कंडेय काटजू ने अब इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

दो नेताओं को फिर लिया गया था हिरासत में

पीस बॉन्ड पर रिहाई के कुछ दिन बाद ही सौरव दास और आशुतोष रांका को दोबारा हिरासत में लिए जाने की घटना सामने आई। 14 अक्टूबर को दोनों को जंतर-मंतर पर कथित तौर पर प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और पीस बॉन्ड की शर्तें तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

इसके बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वे करीब एक सप्ताह तक तिहाड़ जेल में बंद रहे। बाद में लिखित आश्वासन देने के बाद उन्हें जमानत मिली।

इस घटनाक्रम के बाद पीस बॉन्ड की शर्तों और नेताओं के आंदोलन करने के अधिकार को लेकर चर्चा तेज हो गई। अब मार्कंडेय काटजू ने इसी पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से CJP नेताओं की राजनीतिक छवि प्रभावित हुई है।

CJP के भविष्य पर काटजू ने उठाए सवाल

मार्कंडेय काटजू ने अपने इंटरव्यू में CJP के भविष्य को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी की रीढ़ टूट चुकी है और अब उसके नेताओं के लिए पहले की तरह आंदोलन करना मुश्किल हो सकता है। उनके मुताबिक, पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद नेताओं की स्थिति कमजोर हुई है।

हालांकि, किसी राजनीतिक संगठन का भविष्य केवल एक कानूनी घटनाक्रम या किसी व्यक्ति की टिप्पणी से तय नहीं होता। CJP आगे किस तरह की राजनीतिक गतिविधियां करती है और उसके नेता अपने आंदोलन को किस दिशा में ले जाते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल पीस बॉन्ड की शर्तों, नेताओं की ओर से दिए गए आश्वासन और भविष्य में उनके आंदोलन करने की स्थिति को लेकर है। वहीं, मार्कंडेय काटजू की टिप्पणी ने इस विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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