12 नवंबर से ड्राइवरों का अनिश्चितकालीन ‘स्टीयरिंग छोड़ो’ आंदोलन, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर किया ऐलान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अपनी मांगों को लेकर ड्राइवर संगठनों ने आंदोलन का ऐलान किया है। ऑल इंडिया ड्राइवर जॉइंट कमेटी एवं छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंगठन ने 12 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन ‘स्टीयरिंग छोड़ो’ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी होने तक वाहन चालक अपने वाहन खड़े रखेंगे और स्टीयरिंग नहीं थामेंगे।
संगठन की ओर से जारी पर्चे में ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और अधिकारों से जुड़ी पांच सूत्रीय मांगें रखी गई हैं। इसके तहत सरकार से ड्राइवर आयोग और ड्राइवर कल्याण बोर्ड का गठन करने की मांग की गई है, ताकि चालकों की समस्याओं और हितों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाई जा सके।
20 लाख का बीमा और 60 साल के बाद पेंशन की मांग
ड्राइवर संगठनों की मांग है कि प्रत्येक वाहन चालक को 20 लाख रुपये का बीमा दिया जाए और 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद पेंशन की व्यवस्था की जाए। संगठन का कहना है कि दिन-रात सड़कों पर काम करने वाले ड्राइवरों और उनके परिवारों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
दुर्घटना के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
संगठनों ने सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में ड्राइवरों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि हादसों के बाद ड्राइवरों को सीधे अपराधी मानकर कार्रवाई न की जाए, बल्कि दुर्घटना की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई हो।
इसके अलावा हर साल 1 सितंबर को राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस घोषित करने और इस दिन सरकारी अवकाश देने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि परिवहन व्यवस्था में ड्राइवरों के योगदान को सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष दिवस होना चाहिए।
वाहन खड़े कर आंदोलन में शामिल होने की अपील
12 नवंबर से प्रस्तावित आंदोलन को लेकर संगठनों ने सभी ड्राइवरों से अपने वाहन खड़े कर एकजुटता दिखाने और आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। जारी पर्चे में स्पष्ट किया गया है कि सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक पहल होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन और संगठन से जुड़ी जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 8085401673, 7225997263 और 7222962010 जारी किए गए हैं। अब देखना होगा कि ड्राइवर संगठनों के इस ऐलान पर सरकार क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित हड़ताल का परिवहन व्यवस्था पर कितना असर पड़ता है।



