डेटा सेंटर कारोबार में अडानी ग्रुप का बड़ा दांव, 1.5 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज जुटाने की तैयारी

गौतम अडानी का समूह अपने डेटा सेंटर कारोबार का विस्तार करने के लिए करीब 1.5 बिलियन डॉलर यानी 12,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का विदेशी कर्ज जुटाने की तैयारी कर रहा है। इस फंडिंग के लिए समूह दुनिया के कई बड़े बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है। यह कदम कंपनी की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना का हिस्सा है।
अडानी ग्रुप ने साल 2035 तक डेटा सेंटर सहित अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में करीब 100 बिलियन डॉलर निवेश करने का लक्ष्य रखा है। प्रस्तावित कर्ज इसी योजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इन बड़े विदेशी बैंकों से चल रही बातचीत
इस फंडिंग की जिम्मेदारी अडानी ग्रुप की संयुक्त उद्यम कंपनी अडानीकॉनेक्स प्राइवेट ने संभाली है। यह कंपनी डेटा सेंटर ऑपरेटर एजकॉनेक्स के साथ मिलकर बनाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी इस विदेशी कर्ज के लिए DBS ग्रुप, फर्स्ट अबू धाबी बैंक और मित्सुबिशी UFJ फाइनेंशियल ग्रुप सहित कई बड़े बैंकों से बातचीत कर रही है।
इसके अलावा नैटिक्सिस, ING बैंक और सोसाइटी जनरले जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से भी चर्चा जारी है। कर्ज की ब्याज दरों और अन्य शर्तों पर बातचीत हो रही है। माना जा रहा है कि यह लोन पांच से सात साल की अवधि के लिए हो सकता है। हालांकि, अभी तक इसकी शर्तों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
रिलायंस से मिल रही है कड़ी टक्कर
भारत के डेटा सेंटर कारोबार में अडानी ग्रुप को मुकेश अंबानी की रिलायंस से भी मुकाबला करना पड़ रहा है। रिलायंस समूह ने अगले सात सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में 110 बिलियन डॉलर तक निवेश करने की योजना बनाई है।
दोनों बड़े कारोबारी समूहों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से भारत में डेटा सेंटर सेक्टर का विस्तार तेज होने की उम्मीद है। AI और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण कंपनियों को बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा स्टोरेज की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से देश में नए डेटा सेंटर स्थापित करने पर निवेश बढ़ रहा है।
2030 तक 8 गीगावाट हो सकती है डेटा सेंटर क्षमता
भारत में डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अगस्त 2026 में देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता करीब 1.57 गीगावाट थी। अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर लगभग 8 गीगावाट हो सकती है।
इस क्षेत्र में अगले सात से आठ वर्षों के दौरान करीब 200 बिलियन डॉलर का निवेश आने की संभावना जताई जा रही है। अडानी ग्रुप की नई फंडिंग योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ महीने पहले ही अडानीकॉनेक्स ने डेटा सेंटर कारोबार के लिए 800 मिलियन डॉलर का कर्ज जुटाया था। पिछला कर्ज 18 महीने की अवधि के लिए लिया गया था। अब प्रस्तावित 1.5 बिलियन डॉलर की फंडिंग से कंपनी को अपने विस्तार की योजना को गति देने में मदद मिल सकती है।



