चक्रवात ‘अर्नब’ का बढ़ता खतरा: आंध्र प्रदेश में 140 KM/H की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं, उत्तर भारत में भारी बारिश की आशंका

रायपुर। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर मौसम विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुमान के मुताबिक, तूफान 28 अक्टूबर तक आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के आसपास तट से टकरा सकता है। इसके और तीव्र होकर अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई गई है।
तूफान का असर केवल आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मौसम प्रणालियों के आपसी प्रभाव और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के साथ संपर्क के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली और नेपाल के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश हो सकती है।
आंध्र प्रदेश में 18 जिले प्रभावित होने की आशंका
आंध्र प्रदेश के करीब 18 जिलों पर तूफान का असर पड़ सकता है। तट से टकराने के दौरान हवा की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। राज्य सरकार के अनुसार, करीब 7 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हालात की निगरानी कर रहे हैं। तूफान के खतरे को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।
ओडिशा में 125 KM/H की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं
चक्रवात के आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने के दौरान ओडिशा में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। राज्य में 125 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
प्रशासन ने तटीय इलाकों में तैयारियां तेज कर दी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
उत्तर भारत में भी भारी बारिश का खतरा
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, तूफान के जमीन से गुजरने के बाद उसका सिस्टम उत्तर-पश्चिम और फिर उत्तर दिशा की ओर बढ़ सकता है। इसके साथ बंगाल की खाड़ी में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र मिलकर मौसम को और प्रभावित कर सकता है।
इस स्थिति में उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की आशंका है। राजधानी दिल्ली में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग ने झारखंड और ओडिशा में 29 अक्टूबर तथा बिहार में 29 और 30 अक्टूबर को आंधी के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है।
क्यों बढ़ सकता है तूफान का असर?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, चक्रवात के आगे बढ़ने के दौरान दूसरी सक्रिय मौसम प्रणालियों के साथ उसका संपर्क बारिश और हवाओं की तीव्रता को प्रभावित कर सकता है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र भी इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, तूफान का वास्तविक मार्ग और अलग-अलग राज्यों में इसका असर मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमानों पर निर्भर करेगा। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर नजर रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
नोट: यह खबर आपके दिए गए विवरण के आधार पर तैयार की गई है। चक्रवात के नाम, संभावित मार्ग और चेतावनियों की ताजा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।



