जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग पर जारी प्रदर्शन में तोड़फोड़ का आरोप, प्रशासन ने जारी किया अंतिम नोटिस

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने समेत अन्य मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। 12 अक्टूबर से चल रहे प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों पर परिसर में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया है। प्रशासन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
प्रशासन के मुताबिक, देर रात कुछ प्रदर्शनकारियों ने गार्ड रूम के शीशे तोड़ दिए और गेट नंबर-4 के पास दीवार तथा लोहे के दरवाजे को हथौड़े से नुकसान पहुंचाया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है, जिसमें कुछ लोग हथौड़े से लोहे की ग्रिल तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामला विश्वविद्यालय परिसर के अंदर का है और उसे अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन खाली करने का आदेश
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को अंतिम नोटिस जारी कर गुलिस्तान-ए-गालिब बिल्डिंग और गालिब लॉन खाली करने का निर्देश दिया है। प्रशासन के अनुसार, इन स्थानों पर राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभाग संचालित होते हैं। वहां प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी से विभागों के सामान्य कामकाज में बाधा आ रही है।
नोटिस में आदेश का पालन नहीं करने पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने 8 नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का फैसला किया है। इस अवधि में मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं भी ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी।
प्रशासन और छात्रों के दावों में मतभेद
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए गए हैं। सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार की जांच के लिए कमेटी गठित करने की बात भी कही गई है। प्रशासन का दावा है कि छात्रों ने कथित मानहानिकारक बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने पर सहमति जताई है।
हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के इस दावे को खारिज किया है। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उनकी प्रमुख मांगों में छात्र संघ चुनाव बहाल करना और छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देना शामिल है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने के लिए अब तक कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की है।
नारों को लेकर भी परिसर में बढ़ा तनाव
23 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में ‘फ्री शरजील इमाम’ और ‘फ्री कश्मीर’ जैसे नारे लिखे जाने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए परिसर के बाहर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।
छात्रों के आंदोलन, प्रशासन के आरोपों और चुनाव बहाली की मांग के बीच विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बना हुआ है। फिलहाल, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन ने परिसर में शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य बनाए रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।



