शादी का झांसा देकर बिहार की बेटी को बंगाल के कोठे में बेचा,50 रुपए देकर दलाल के साथ घूमे दारोगा
पश्चिम बंगाल के रेडलाइट एरिया में सादे कपड़ों में पहुंची पुलिस; 2 हजार से शुरू हुआ सौदा 1 हजार रुपए में तय हुआ, संचालिका को चकमा देकर युवती को सुरक्षित निकाला

दिल्ली। बिहार के पूर्वी चंपारण में एक युवती को शादी का झांसा देकर देह व्यापार के धंधे में धकेलने (sold) का मामला सामने आया है। पड़ोस में रहने वाले युवक ने पहले उससे दोस्ती की, फिर शादी का भरोसा दिलाकर घर से बुलाया।
इसके बाद उसके दो दोस्तों ने युवती को मुजफ्फरपुर से पूर्णिया पहुंचाया और वहां से पश्चिम बंगाल के रेडलाइट एरिया में बेच दिया। युवती की एक फोन कॉल ने मां को पुलिस तक पहुंचाया। इसके बाद बिहार पुलिस ने करीब 500 किलोमीटर दूर जाकर विशेष ऑपरेशन चलाया और युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मामले में पुलिस की कार्रवाई किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। सब इंस्पेक्टर ने 50 रुपए देकर दलाल के साथ रेडलाइट इलाके की गलियां छानीं। लड़की पसंद करने के बहाने कोठे की संचालिका से बातचीत की और फिर बाकी पुलिस टीम के पहुंचते ही युवती को बाहर निकाल लिया।
मां की एक कॉल से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना 8 अक्टूबर 2026 की है। सुबह करीब 8 बजे पूर्वी चंपारण के केसरिया थाने में एक महिला पहुंची। वह बदहवास थी और थानाध्यक्ष राहुल से मिलने की जिद कर रही थी। सामने आते ही उसने रोते हुए बेटी को बचाने की गुहार लगाई।
महिला ने बताया कि बेटी ने फोन कर कहा है कि उसे जबरन गलत काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके बाद फोन कट गया और उससे संपर्क नहीं हो सका।
महिला के पास सिर्फ बेटी का मोबाइल नंबर था। पुलिस ने तत्काल नंबर को सर्विलांस पर लिया। लोकेशन पश्चिम बंगाल के पोंजीपोड़ा रेडलाइट एरिया में मिली। इसके बाद थानाध्यक्ष ने सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर, राजकुमार राजू, सोनू कुमार और महिला पुलिसकर्मी सुनीता कुमारी की टीम बनाई। युवती के पिता को साथ लेकर पुलिस उसी दिन बंगाल रवाना हो गई।
50 रुपए देकर दलाल के साथ घूमे दारोगा
करीब 500 किलोमीटर का सफर तय कर पुलिस टीम पोंजीपोड़ा पहुंची। युवती की सुरक्षित बरामदगी (sold) के लिए सादे कपड़ों में ऑपरेशन चलाने की योजना बनाई गई। शाम होते ही सब इंस्पेक्टर मनोज ठाकुर रेडलाइट एरिया पहुंचे। टीम के बाकी सदस्य आसपास तैनात रहे।
इसी दौरान एक अधेड़ व्यक्ति उनके पास आया और पूछा कि कैसी लड़की चाहिए। उसने 50 रुपए लेकर पूरा बाजार घुमाने की बात कही। दारोगा ने उसे पैसे दिए और उसके साथ गलियों में घूमने लगे। दलाल एक के बाद दूसरी गली दिखाता रहा। तीसरी गली में मनोज ठाकुर ने एक युवती की ओर इशारा कर उसे पसंद करने की बात कही।
इसके बाद दलाल उन्हें कोठे की संचालिका लक्की के पास ले गया। लक्की ने युवती के बदले 2 हजार रुपए मांगे। दारोगा ने 500 रुपए देने की बात कही। काफी देर तक मोलभाव हुआ और आखिरकार 1 हजार रुपए में सौदा तय हुआ।
मोबाइल जमा कराने की शर्त पर अड़ी संचालिका
पैसे तय होने के बाद मनोज ठाकुर अंदर जाने लगे, लेकिन संचालिका लक्की ने मोबाइल फोन जमा कराने की शर्त रख दी। दारोगा इसके लिए तैयार नहीं हुए। दोनों के बीच बहस होने लगी। संचालिका बिना मोबाइल जमा कराए अंदर जाने देने को तैयार नहीं थी। ऐसे में दारोगा को बाहर निकलना पड़ा।
हालांकि, उन्होंने बातचीत के जरिए संचालिका को उलझाए रखा। इसी बीच पुलिस की बाकी टीम स्थानीय पुलिस की मदद से मौके पर पहुंच गई। पुलिस को देखते ही रेडलाइट एरिया में अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान मनोज ठाकुर कोठे के अंदर पहुंचे और युवती को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद टीम उसे लेकर मोतिहारी लौट आई।
शादी का भरोसा देकर मुजफ्फरपुर स्टेशन बुलाया
पुलिस के सामने युवती ने बताया कि पड़ोस में रहने वाले युवक से उसकी जान-पहचान थी। दोनों के बीच बातचीत और मुलाकातें बढ़ीं तो रोहित ने शादी का प्रस्ताव रखा। उसके झांसे में आकर युवती घर छोड़कर चली गई। रोहित ने उसे मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर मिलने बुलाया था।
युवती वहां पहुंची, लेकिन युवक खुद नहीं आया। कुछ देर बाद उसके दो दोस्त पहुंचे। उन्होंने कहा कि युवक ने उन्हें लेने भेजा है। युवती ने भरोसा कर लिया और उनके साथ चली गई। दोनों उसे मुजफ्फरपुर से पूर्णिया ले गए और रानी नाम की महिला के हवाले कर दिया।
खाने के बाद बेहोश हुई, बंगाल में खुली आंख
पीड़िता के मुताबिक, रानी ने शुरुआत में उसके साथ अच्छा व्यवहार (sold) किया। उसे खाना खिलाया और भरोसा दिलाया कि अगले दिन उसके प्रेमी से शादी करा दी जाएगी। युवती को लगा कि उसकी शादी होने वाली है। लेकिन रात में खाना खाने के बाद वह बेहोश हो गई।
जब होश आया तो खुद को पश्चिम बंगाल के रेडलाइट एरिया में पाया। वहां उसे जबरन देह व्यापार में धकेलने की कोशिश की गई। इसी दौरान उसने किसी तरह मां को फोन कर अपनी स्थिति बताई और मदद मांगी। फोन कटने के बाद मां ने पुलिस से संपर्क किया। आखिरकार उसी एक कॉल के आधार पर पुलिस ने करीब 500 किलोमीटर दूर पहुंचकर युवती को सुरक्षित बचा लिया। मामले में पुलिस आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।



