दिल्ली पुलिस के ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड, मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन का किया था नेतृत्व

शाहदरा थाने में झड़प से शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत एक आम नागरिक और वकील के बीच हुए झगड़े से हुई थी। दोनों पक्ष शिकायत लेकर शाहदरा थाने पहुंचे थे, जहां उनके बीच मारपीट की स्थिति बन गई। इस दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ पर पिस्तौल दिखाकर धमकाने के आरोप भी लगे थे। मामले ने तूल पकड़ा तो ACP और थाना प्रभारी (SHO) का तबादला कर दिया गया।
वकील ललित बंसल ने आरोप लगाया था कि झड़प के दौरान उनके सिर में चोट आई थी। वहीं, वकीलों ने ACP पर रिवॉल्वर दिखाकर धमकी देने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। हालांकि, पुलिस का कहना था कि ACP अपनी सर्विस पिस्टल बदल रहे थे, इसलिए उनके हाथ में पिस्तौल थी।
ACP और SHO का किया गया था तबादला
वकीलों के बढ़ते दबाव के बीच 28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस प्रशासन ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर के पद से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वूमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) में स्थानांतरित कर दिया था। वहीं, SHO अरुण कुमार का तबादला सिक्योरिटी ब्रांच में कर दिया गया। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली थी।
पुलिसकर्मियों ने रखी थीं चार मांगें
ACP और SHO के खिलाफ कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मियों में नाराजगी बढ़ गई थी। इसी के विरोध में सोमवार को ACP मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में 50 से अधिक पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों की मांग थी कि ड्यूटी के दौरान उनके साथ होने वाली बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर के सामने चार मांगें रखी थीं। इनमें ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने, दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और पुलिस के साथ हाथापाई करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने की मांग शामिल थी। इसके बाद अब ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है।



