छत्तीसगढ़ सरकार पर पूर्व सीएम का हमला, हसदेव-अडानी मुद्दे पर सरकार को घेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर प्रशासनिक अराजकता और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए हैं।
विपक्षी नेताओं ने कहा कि प्रदेश में मंत्री और सांसद खुले तौर पर अधिकारियों से भिड़ रहे हैं, जिससे यह साफ दिखता है कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी है और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने साय सरकार के खिलाफ कहा, कि सरकार जनता के मुद्दों से ज्यादा अपने “स्वार्थ पूर्ति” में लगी हुई है। राज्य में कोई किसी की सुनने वाला नहीं है और प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह दबाव में काम कर रहा है। विपक्ष ने हाल के घटनाक्रमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के भीतर ही टकराव की स्थिति दिखाई दे रही है।
हसदेव अरण्य क्षेत्र को लेकर सरकार को घेरा
हसदेव अरण्य क्षेत्र को लेकर भी सरकार को घेरा गया। विपक्ष ने दावा किया कि उद्योगपति गौतम अडानी की परियोजनाओं के लिए हसदेव क्षेत्र में लगभग 7 लाख पेड़ काटने की मंजूरी दी गई है।
आरोप लगाया गया कि इससे आदिवासी क्षेत्रों, जंगलों और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस मुद्दे पर चुप हैं और सरकार लगातार कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की प्राकृतिक संपदा निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश हो रही है। नेताओं ने कहा कि हसदेव केवल जंगल नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी परिवारों की जीवनरेखा है।
ऐसे में पेड़ों की कटाई और खनन परियोजनाओं को मंजूरी देना पर्यावरण और स्थानीय समुदाय दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। हालांकि राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

