ईरान युद्ध के बाद ताइवान पर बढ़ा तनाव, चीन ने द्वीप के चारों ओर बढ़ाई सैन्य घेराबंदी

ईरान युद्ध के बाद अब दुनिया की नजर ताइवान के आसपास बढ़ते तनाव पर है। चीन ने पिछले कुछ वर्षों में ताइवान के चारों ओर अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ाई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब लगभग हर समय चीनी नौसेना के 5 से 6 युद्धपोत ताइवान को चारों तरफ से घेरे रहते हैं। मई 2026 के अंत में भी चीन के बड़े गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर समेत कई युद्धपोत ताइवान के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और ताइवान स्ट्रेट में तैनात थे। यह कोई सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि अब चीन की नियमित रणनीति का हिस्सा बन चुका है।
कैसे बढ़ाया गया घेरा?
चीन ने ताइवान को अचानक नहीं घेरा, बल्कि धीरे-धीरे अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई।
- वर्ष 2020 में चीन ने ताइवान स्ट्रेट में एक युद्धपोत की नियमित गश्त शुरू की।
- इसके साथ ताइवान के उत्तर और दक्षिणी तट के पास दो अन्य जहाज तैनात किए गए।
- 2022 में चौथा युद्धपोत ताइवान के पूर्वी तट पर तैनात किया गया।
- 2024 के बाद चीन ने पूर्वी क्षेत्र में पांचवें और छठे युद्धपोत की भी नियमित तैनाती शुरू कर दी।
अब ताइवान के आसपास 5 से 6 चीनी युद्धपोत लगातार मौजूद रहते हैं। किसी विशेष अभियान या तनावपूर्ण स्थिति में इनकी संख्या और बढ़ जाती है।
चीन का उद्देश्य क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं कर रहा, बल्कि संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है। पहले चीन छोटे युद्धपोतों का इस्तेमाल करता था, लेकिन अब उनकी जगह आधुनिक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात किए जा रहे हैं। वर्तमान में चीन के पास ऐसे 48 डिस्ट्रॉयर मौजूद हैं।
खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश
ताइवान के पूर्वी तट के पास लगातार मौजूद रहकर चीन समुद्री क्षेत्र और समुद्र की गहराई का विस्तृत नक्शा तैयार कर रहा है। इससे भविष्य में पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। साथ ही चीन ताइवान की सेना, संचार व्यवस्था और सैन्य तैनाती की जानकारी भी जुटा रहा है।
अमेरिका को दूर रखने की रणनीति
ताइवान के पूर्वी हिस्से में हुलिएन और ताइतुंग जैसे महत्वपूर्ण सैन्य एयरबेस मौजूद हैं। चीन इन इलाकों के पास अपने युद्धपोत तैनात कर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानवाहक पोतों की पहुंच को सीमित करना चाहता है।
बढ़ रहा है दबाव
चीन लगातार ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा पार कर सैन्य उड़ानें भर रहा है और विदेशी जहाजों के प्रति आक्रामक रुख भी दिखा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन बिना युद्ध शुरू किए लगातार दबाव बनाकर ताइवान को यह संदेश देना चाहता है कि भविष्य में उसके कब्जे का विरोध करना बेहद कठिन होगा।

