हाइड्रोजन से चलेंगी गाड़ियां! सरकार 10 हाईवे पर कर रही ट्रायल, सफर होगा सस्ता और प्रदूषण भी घटेगा

भारत सरकार अब स्वच्छ और सस्ते ईंधन के रूप में हाइड्रोजन फ्यूल को बढ़ावा दे रही है। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के बाद अब हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रदूषण कम करना, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाना और लोगों को किफायती यात्रा का विकल्प देना है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, सरकार फिलहाल 10 हाईवे कॉरिडोर पर हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाले वाहनों का पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। इनमें दिल्ली-आगरा, पुणे-मुंबई, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी और विशाखापत्तनम सहित कई प्रमुख मार्ग शामिल हैं।
2030 तक का लक्ष्य
सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक हर साल 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए करीब 19,744 करोड़ रुपये का बजट और बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई गई है। इस मिशन से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और लाखों रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
पहले बसों और ट्रकों में होगा इस्तेमाल
सरकार की योजना है कि 2026 से 2030 के बीच सबसे पहले हाइड्रोजन फ्यूल का उपयोग बसों, ट्रकों और सरकारी व व्यावसायिक वाहनों में किया जाए। इसके बाद देशभर में हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन बढ़ने और उत्पादन लक्ष्य पूरा होने पर निजी वाहनों में भी इसका उपयोग बढ़ाया जाएगा।
ट्रायल में क्या परखा जाएगा?
- हाइड्रोजन वाहनों का प्रदर्शन
- लंबी दूरी तय करने की क्षमता
- फ्यूलिंग स्टेशन की व्यवस्था
- लागत और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं
हाइड्रोजन की कीमत और सफर का खर्च
फिलहाल भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत करीब ₹279 प्रति किलोग्राम है। सरकार इसे 2030 तक ₹200 प्रति किलोग्राम से कम करने का लक्ष्य रख रही है।
1000 किलोमीटर की यात्रा का अनुमानित खर्च:
- पेट्रोल: ₹5,000
- डीजल: ₹4,600
- सीएनजी: ₹2,812
- हाइड्रोजन: ₹2,790
यानी मौजूदा कीमतों पर भी हाइड्रोजन से सफर सीएनजी जितना किफायती है और भविष्य में यह और सस्ता हो सकता है।
हाइड्रोजन वाहन कैसे काम करते हैं?
हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन (FCEV) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनाई जाती है। इसी बिजली से वाहन चलता है और उत्सर्जन के रूप में केवल पानी की भाप निकलती है। इसलिए इसे पर्यावरण के लिए बेहद स्वच्छ ईंधन माना जाता है।
सबसे बड़ी चुनौती
भारत ने अभी तक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की सीमित क्षमता विकसित की है। 2030 तक तय लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्पादन क्षमता, फ्यूलिंग स्टेशन और जरूरी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

