नकटी विवाद: अकबर ने स्वीकार की केदार की चुनौती
चुनौती स्वीकार, दस्तावेज पहले ही जारी होने का दावा

रायपुर। नकटी भूमि प्रकरण को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर(Akbar) ने वन मंत्री केदार कश्यप की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा है कि जिन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की बात कही जा रही है, वे पहले ही मीडिया के माध्यम से जारी किए जा चुके हैं। उनका दावा है कि उनके सभी आरोप सरकारी दस्तावेजों पर आधारित हैं।
436 हेक्टेयर भूमि के प्रस्ताव का किया जिक्र
मोहम्मद अकबर(Akbar) ने बयान में कहा कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार नकटी, सेरीखेड़ी, मंदिर हसौद, रमचंडी, बरौंदा और रीको की कुल 436.01 हेक्टेयर (करीब 1076 एकड़) भूमि को टाउन डेवलपमेंट स्कीम के तहत विकसित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि नकटी की कुछ जमीनें भी इस योजना में शामिल हैं, इसलिए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि विवादित भूमि भी इस प्रस्ताव का हिस्सा है या नहीं।
‘सरकारी दस्तावेजों के आधार पर उठाए सवाल’
कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने किसी अफवाह के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार की आधिकारिक निविदा और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, संबंधित दस्तावेज 11 जुलाई को ही मीडिया के लिए जारी किए जा चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा सार्वजनिक करने की बात उचित नहीं है।
निविदा के पन्नों का दिया हवाला
अकबर(Akbar) ने कहा कि संबंधित निविदा दस्तावेज कुल 245 पृष्ठों का है। इसके पहले पृष्ठ पर नवा रायपुर अटल नगर के लेयर-2 स्थित टाउन डेवलपमेंट स्कीम के लिए डेवलपर चयन का उल्लेख है। उन्होंने बताया कि निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। वहीं दस्तावेज के बिंदु 1.1.4 में संबंधित गांवों और कुल भूमि का विवरण दर्ज है, जबकि पृष्ठ 28 से 31 तक योजना के नक्शे और ले-आउट शामिल हैं।
‘दस्तावेज कहां भेजने हैं, मंत्री बताएं’
मोहम्मद अकबर ने कहा कि यदि मंत्री केदार कश्यप को इन दस्तावेजों की अलग से आवश्यकता है तो वे बताएं कि उन्हें कहां भेजना है। उन्होंने कहा कि वे मंत्री की चुनौती स्वीकार करते हैं और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
नकटी भूमि प्रकरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर सरकार पर भूमि से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से आरोपों को खारिज किया जा रहा है। ऐसे में इस मामले पर आगे सरकार की ओर से क्या जवाब आता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

