NEET मामले पर सरकार और CJP के बीच 5 सूत्रीय सहमति, आंदोलन स्थगित

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पिछले कई दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लंबित सभी मांगों पर पूर्ण सहमति बन गई है। सरकार द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद CJP ने अपने देशव्यापी आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का औपचारिक एलान कर दिया है।
इस घटनाक्रम को देशभर में लाखों विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के संघर्ष की एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
उच्च स्तरीय बैठक में किन मुद्दों पर बनी सहमति?
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद आयोजित इस मैराथन बैठक में दोनों पक्षों ने छात्रों के हितों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया। वार्ता के बाद निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सहमति पत्र जारी किया गया:
1. सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच:
NEET-UG पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय न्यायिक समिति गठित करने का लिखित आश्वासन दिया है। यह समिति निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
2. छात्रों पर दर्ज FIR रद्द होंगी:
गत 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं पर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIR) को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
3. ₹1 करोड़ के मुआवजे पर मुहर:
पेपर लीक प्रकरण और आंदोलन के दौरान प्रभावित हुए पीड़ित परिवारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से ₹1 करोड़ का मुआवजा जल्द से जल्द जारी करने पर सरकार राजी हो गई है।
4. 5-सूत्रीय परीक्षा सुधार समिति:
CJP द्वारा सौंपे गए 5-सूत्रीय परीक्षा सुधार सुझावों को देश की आगामी प्रतिस्पर्धी और प्रवेश परीक्षाओं में लागू करने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।
“यह छात्र शक्ति की बड़ी जीत”: CJP
बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया। उन्होंने इसे देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों की एकजुटता का परिणाम बताया।
“यह केवल हमारी जीत नहीं, बल्कि पारदर्शिता और न्याय की आस लगाए बैठे हर उस छात्र की जीत है जिसकी मेहनत दांव पर लगी थी। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और न्यायिक जांच का लिखित आश्वासन यह साबित करता है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।”
— अभिजीत दिपके, संस्थापक, CJP
हालाँकि, CJP नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह स्थगन केवल अस्थायी है। यदि सरकार अपने लिखित आश्वासनों को तय समय-सीमा के भीतर लागू करने में विफल रहती है, तो संगठन बिना किसी पूर्व सूचना के फिर से सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होगा।
NEET मामले का पूरा घटनाक्रम: अब तक क्या हुआ?
NEET परीक्षा के नतीजे घोषित होने के बाद से ही देशभर में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर भारी जनआक्रोश देखने को मिला था।
सड़क से संसद तक प्रदर्शन: छात्रों और विभिन्न युवा संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए, जिसका चरम 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान दिखा।
प्रशासनिक दबाव और इस्तीफा: बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया, जिससे समझौते की राह आसान हुई।
लिखित समझौता: शिक्षा मंत्री के हटने के बाद केंद्र सरकार ने सीधे वार्ता की मेज पर आकर CJP की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।
परीक्षा सुधारों की चुनौती
इस समझौते के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती देश में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख को दोबारा बहाल करना है। प्रस्तावित सुधार समिति के सामने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज, प्रश्नपत्र निर्माण की सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा मानकों को सख्त बनाने जैसे अहम मुद्दे रहेंगे।
फ़िलहाल, देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के रुकने से आम जनजीवन और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों ने राहत की सांस ली है, लेकिन सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अपने वादों को कितनी जल्दी ज़मीन पर उतारती है।

