होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 5-7% शुल्क लगाएगा ईरान? बढ़ सकती है तेल और व्यापार की चिंता

दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर चर्चा में है। ईरान और ओमान के बीच इसे लेकर प्रस्तावित व्यवस्था में जहाजों से शुल्क वसूलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान माल की कीमत के आधार पर करीब 5 से 7 प्रतिशत शुल्क लेने की मांग कर रहा है, जबकि ओमान करीब 3 प्रतिशत शुल्क की बात कर रहा है। अमेरिका किसी भी तरह के शुल्क के पक्ष में नहीं है।
ईरान क्यों लेना चाहता है शुल्क?
ईरान की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को नियंत्रित करने की बात है। शुल्क को समुद्री मार्ग के इस्तेमाल और उससे जुड़ी सेवाओं के बदले लेने की योजना के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, शिपिंग उद्योग ने इस व्यवस्था की व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी प्रतिबंध और बीमा से जुड़ी पाबंदियां भी इसके लागू होने में बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
अमेरिका शुल्क के खिलाफ
अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी तरह का टोल या शुल्क लगाए जाने का विरोध कर रहा है। वहीं, प्रस्तावित ईरान-ओमान समझौते के तहत अगर ईरान को खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण मिलता है, तो इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
क्या हर जहाज को देना होगा शुल्क?
फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्टों में ईरान की ओर से 5 से 7 प्रतिशत और ओमान की ओर से करीब 3 प्रतिशत शुल्क की चर्चा है। लेकिन शुल्क कब लागू होगा, किन जहाजों पर लागू होगा और इसकी कानूनी व्यवस्था क्या होगी, इन मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बनी है।
होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े ऊर्जा निर्यातक देशों के तेल और गैस परिवहन के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध बढ़ने से परिवहन लागत, तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।
ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित व्यवस्था किस रूप में लागू होती है और क्या जहाजों की आवाजाही पर वास्तव में नया शुल्क लगाया जाता है।



