भूपेश बघेल का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- आदिवासियों के अधिकार छीने गए, शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उसे आदिवासी विरोधी सरकार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों को अधिकार संपन्न बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई काम किए गए थे, लेकिन मौजूदा सरकार में उन क्षेत्रों में काम रुक गया है।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि आदिवासियों को पहले मिले अधिकारों को अब कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान आदिवासी क्षेत्रों के विकास, रोजगार और आर्थिक स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया था। उनके मुताबिक, जिन क्षेत्रों में पिछली सरकार ने योजनाओं के जरिए काम किया, वहां अब अपेक्षित गति से काम नहीं हो रहा है।
बच्चों को राजनीति से जोड़ना ओछी मानसिकता
स्कूली छात्रों के प्रदर्शन को कांग्रेस से प्रेरित बताने वाले शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बयान पर भी भूपेश बघेल ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे किसी राजनीतिक दल के नहीं होते। वे देश और प्रदेश का भविष्य हैं।
बघेल ने कहा कि बच्चों को किसी राजनीतिक पार्टी से जोड़ना गलत है। उन्होंने इसे ओछी मानसिकता बताते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं और उनके प्रदर्शन को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय सरकार को उनकी वास्तविक परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और शिक्षा मंत्री पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में पानी और शिक्षकों जैसी बुनियादी सुविधाएं तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
बघेल ने कहा कि शिक्षा मंत्री अपना काम पूरा करने में असफल हो रहे हैं और अपनी कमियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय बच्चों और कांग्रेस पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्कूलों की बुनियादी व्यवस्थाओं को सुधारने और छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की।
टीईटी अनिवार्यता पर सरकार से रास्ता निकालने की मांग
प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की अनिवार्यता को लेकर चल रहे शिक्षकों के प्रदर्शन पर भी भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से इस मामले में समाधान निकालने की मांग की।
बघेल ने कहा कि कई शिक्षक अपनी सेवा का बड़ा हिस्सा पूरा कर चुके हैं और उनकी उम्र का काफी हिस्सा नौकरी करते हुए बीत चुका है। ऐसे में अब उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए कहना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों की स्थिति को समझते हुए ऐसा रास्ता निकालने की मांग की, जिससे उनकी परेशानी का समाधान हो सके।



