डोभाल से रैटक्लिफ तक विदेश दौरों पर कई बड़े नाम, रूस-यूक्रेन से लेकर चीन और कारोबार तक क्या हैं संकेत?

नई दिल्ली। इस समय भारत, अमेरिका और पड़ोसी देशों के कई बड़े नेता और अधिकारी अलग-अलग देशों के दौरे पर हैं। इनमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा अमेरिका के सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ और पाकिस्तान की पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं।
इन सभी यात्राओं का एजेंडा अलग है, लेकिन इनका समय काफी महत्वपूर्ण है। एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच संपर्क बढ़ रहा है, वहीं भारत चीन और रूस के साथ रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत कर रहा है। दूसरी ओर भारत के मंत्री जापान, कनाडा और अमेरिका के साथ व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
रैटक्लिफ का मॉस्को दौरा क्यों अहम?
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ 25 अगस्त को अचानक मॉस्को पहुंचे। सीआईए प्रमुख बनने के बाद यह रूस का उनका पहला दौरा है। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और रूस के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं।
हालांकि रैटक्लिफ की रूसी अधिकारियों के साथ बैठक के एजेंडे को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन उनके दौरे को रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस और ईरान के बीच बढ़ते संबंध भी अमेरिका के लिए चिंता का विषय हैं।
चीन में डोभाल की 25वीं सीमा वार्ता
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 25 अगस्त को बीजिंग पहुंचे। उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता में हिस्सा लिया।
बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा हुई। यह दौरा भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार के बीच हो रहा है। आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए भी दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क अहम माना जा रहा है।
जयशंकर का रूस दौरा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 23 और 24 अगस्त को रूस के दौरे पर रहे। उन्होंने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की। इसमें व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
रूस के साथ भारत के रक्षा और ऊर्जा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऐसे समय में जब रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक दबाव बना हुआ है, जयशंकर का रूस दौरा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
जापान में पीयूष गोयल, निवेश पर जोर
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 24 से 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं। वह करीब 200 सदस्यों वाले भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह जापान में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल बताया जा रहा है।
दौरे के दौरान हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, एआई और नई पीढ़ी की तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर है। भारत जापानी कंपनियों से देश में निवेश बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है।
निर्मला सीतारमण का कनाडा और अमेरिका दौरा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के दौरे पर हैं। कनाडा में वह भारत-कनाडा के पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में हिस्सा लेंगी। इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, एआई, तकनीक, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
अमेरिका में वह जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इसके अलावा वह निवेशकों से भी मुलाकात करेंगी।
मोहन भागवत की वैश्विक यात्रा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। यह यात्रा आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका में वह भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ संवाद करेंगे और संगठन से जुड़े विचारों को सामने रखेंगे।
चीन पहुंचीं मरियम नवाज
पाकिस्तान की पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ भी 25 अगस्त को चार दिवसीय चीन दौरे पर पहुंचीं। उनका दौरा कृषि, तकनीक और निवेश सहयोग पर केंद्रित है। चीन के साथ स्मार्ट खेती, डिजिटल फसल निगरानी और कृषि तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो रही है।
एक साथ इतने दौरे क्या संकेत देते हैं?
इन सभी यात्राओं को एक साथ देखा जाए तो वैश्विक कूटनीति की बदलती तस्वीर सामने आती है। अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर संपर्क बढ़ रहा है। भारत रूस और चीन के साथ रणनीतिक बातचीत जारी रखते हुए जापान, अमेरिका और कनाडा के साथ व्यापार और निवेश पर भी ध्यान दे रहा है। वहीं पाकिस्तान चीन के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में जुटा है।
यानी मौजूदा दौर में भारत की विदेश नीति किसी एक खेमे तक सीमित रहने के बजाय रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ अपने अलग-अलग रणनीतिक और आर्थिक हितों के आधार पर संबंध मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।



