Follow Us on Our Social Media
Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में साय सरकार के नेतृत्व से पर्यटन से खुले रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए द्वार, गांवों से ग्लोबल डेस्टिनेशन तक विकास की नई राह

रायपुर। छत्तीसगढ़ अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत के लिए पहचान बनाने के साथ-साथ पर्यटन को रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने पर जोर दे रही है।

गांवों की समृद्धि का नया आधार बन रहा पर्यटन

छत्तीसगढ़ की असली खूबसूरती उसके गांवों, जंगलों, पहाड़ों, झरनों और जनजातीय जीवन में दिखाई देती है। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में आने वाले पर्यटक केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय खान-पान, कला, संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ें।

ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय परिवारों को पर्यटकों से सीधे आय प्राप्त होने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। भोजन, परिवहन, हस्तशिल्प, गाइड सेवा और अन्य सुविधाओं के जरिए गांवों में एक पूरा स्थानीय पर्यटन तंत्र विकसित करने पर जोर है।

महिलाओं के हाथों में पर्यटन की कमान

पर्यटन के क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इसका अहम उदाहरण है। सूरजपुर की झील में ग्रामीण महिलाएं बोटिंग, गाइड सेवा और हस्तशिल्प बिक्री जैसी गतिविधियों से जुड़कर अपने गांव के आसपास ही रोजगार प्राप्त कर रही हैं।

विहान योजना और स्थानीय मिशनों से जुड़ी महिलाओं के लिए इन गतिविधियों के जरिए प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,500 रुपये तक की आय का दावा किया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिल रहा है।

चित्रकोट से सिरपुर तक पर्यटन का विस्तार

बस्तर का चित्रकोट और तीरथगढ़, सरगुजा का मैनपाट, जशपुर की प्राकृतिक संपदा और सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन आकर्षण हैं।

चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सिरपुर के व्यापक पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वीकृति को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। रतनपुर के महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

धार्मिक आस्था से पर्यटन तक की यात्रा

छत्तीसगढ़ सरकार की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। IRCTC के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन और 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के अयोध्या एवं काशी दर्शन का दावा किया गया है।

फिल्म पर्यटन से निवेश और रोजगार की उम्मीद

छत्तीसगढ़ में पर्यटन का दायरा अब फिल्म निर्माण तक भी बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई है।

कन्वेंशन सेंटर और फिल्म सिटी के विकास की अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये बताई गई है। फिल्म निर्माण बढ़ने से होटल, परिवहन, कैटरिंग, तकनीकी सेवाओं, मेकअप, सेट निर्माण, सुरक्षा और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

डिजिटल पर्यटन पर भी जोर

आधुनिक पर्यटक यात्रा से पहले ऑनलाइन जानकारी तलाशता है और होटल व अन्य सुविधाओं की बुकिंग डिजिटल माध्यम से करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन बुकिंग और पर्यटन संबंधी जानकारी को एक मंच पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से लगभग 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से करीब 31 करोड़ 75 लाख रुपये के राजस्व की जानकारी दी गई है।

युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा क्षेत्र

पर्यटन के जरिए स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर भी जोर है। प्रदेश में 390 से अधिक टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंटों तथा 26 होटलों के पंजीकरण की जानकारी दी गई है।

पर्यटक गाइड, आतिथ्य, पर्यटन संचालन, फिल्म निर्माण और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

लोककला और संस्कृति बनेगी पर्यटन की पहचान

पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। ‘रंगतरंग’, ‘पावस प्रसंग’, ‘रंगपरव’ और ‘लोकरंग पर्व’ जैसे आयोजनों के जरिए लोक एवं शास्त्रीय कलाकारों को मंच देने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के माध्यम से लोकनाट्य, लोकनृत्य, लोकगाथा, संगीत और छत्तीसगढ़ी भाषा में लेखन सहित विभिन्न लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

कलाकारों और साहित्यकारों को आर्थिक सहायता

कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना, लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना और वरिष्ठ कलाकारों-साहित्यकारों के लिए वित्तीय सहायता जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता, 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार रुपये का लाभ और 407 जरूरतमंद वरिष्ठ कलाकारों व साहित्यकारों को करीब 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दिए जाने की जानकारी दी गई है।

धरोहर संरक्षण से पर्यटन को मिलेगा बल

पर्यटन विकास के साथ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य किए जाने तथा 12 स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है।

रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के उन्नयन और नई गैलरी विकसित करने का प्रस्ताव भी इसी दिशा का हिस्सा है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश के जनजातीय नायकों और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटकों तक पहुंचाने की तैयारी है।

2028 तक नई पर्यटन पहचान बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश-दुनिया के सामने स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में हर वर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, समुदाय आधारित पर्यटन, निजी निवेश और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल से निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए विकसित करने की योजना है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये के निवेश और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।

पर्यटन से आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़

सरकार की पर्यटन विकास की सोच का केंद्र यह है कि छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटकों के खर्च का अधिक से अधिक हिस्सा स्थानीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचे। पर्यटक स्थानीय उत्पाद खरीदें, स्थानीय भोजन का स्वाद लें, गांवों में ठहरें और लोककलाओं से परिचित हों—इससे ग्रामीण परिवारों, महिलाओं, युवाओं, कलाकारों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।

चित्रकोट की जलधारा से लेकर सिरपुर की विरासत और बस्तर की लोकसंस्कृति से लेकर सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता तक, पर्यटन को छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सांस्कृतिक विकास यात्रा का महत्वपूर्ण माध्यम बनाने की कोशिश की जा रही है।

पर्यटन का यह मॉडल सफल होता है तो इससे प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं, जिससे गांवों तक आर्थिक गतिविधियां पहुंचाने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

Follow Us on Our Social Media

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button