Gen Z आंदोलनों पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- लोकतंत्र में हर राय की आजादी, आपातकाल का रास्ता नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने Gen Z और छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलनों को लेकर कहा है कि लोकतंत्र में लोगों को अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखने और उसे व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी संवाद और चर्चा में विश्वास करती है और आपातकाल थोपकर शासन करना उसकी नीति नहीं है।
लोकतंत्र में संवाद को बताया जरूरी
अमित शाह ने कहा कि देश लोकतांत्रिक व्यवस्था में है और अलग-अलग विषयों पर लोगों की अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है और सरकार को भी ऐसे विचारों को सुनकर संवाद के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता में होने के बावजूद सरकार आपातकाल लगाकर शासन करने के रास्ते पर नहीं चल सकती। उनके मुताबिक, आपातकाल की राजनीति कांग्रेस की संस्कृति रही है, जबकि भाजपा बातचीत और चर्चा के माध्यम से आगे बढ़ने में विश्वास रखती है।
छात्र आंदोलनों को लेकर चर्चा
Gen Z के नेतृत्व वाले आंदोलनों के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अमित शाह ने लोकतांत्रिक अधिकारों और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं और नागरिकों की ओर से उठाए जाने वाले विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालांकि, दिए गए विवरण में छात्रों के आंदोलन से जुड़े कुछ दावे और घटनाक्रम स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हैं, इसलिए उन्हें तथ्य के रूप में नहीं जोड़ा गया है।
भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का दावा
अमित शाह ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राय को महत्व दिया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक प्रतिष्ठा में भी सुधार हुआ है। शाह ने प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों में उन्हें उच्च अनुमोदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि कई देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान प्रदान किए हैं, जिसे उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़ा।



