देशभर में जल संरक्षण की बड़ी मुहिम, 1.55 करोड़ से ज्यादा जल संरचनाएं तैयार

बारिश के पानी को सहेजने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए देशभर में जल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जल संचय जन भागीदारी पहल के अंतर्गत 1.55 करोड़ से अधिक वर्षा जल संग्रह और भूजल रिचार्ज संरचनाएं बनाई गई हैं। इस पहल का उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोकना और भविष्य के लिए जल उपलब्धता बढ़ाना है। अभियान में सरकार के साथ पंचायतों, शहरी निकायों, स्कूलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है ‘कैच द रेन’ अभियान?
‘कैच द रेन’ यानी बारिश का पानी जहां और जब गिरे, उसे वहीं सहेजने की मुहिम की शुरुआत 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर हुई थी। इसके तहत घरों, स्कूलों, कार्यालयों और आवासीय परिसरों में वर्षा जल संग्रह की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाता है। साथ ही तालाबों की सफाई, पुराने जल स्रोतों के पुनरुद्धार, रिचार्ज पिट बनाने और खराब पड़े बोरवेल को दोबारा उपयोगी बनाने जैसे कार्य किए जाते हैं।
1.55 करोड़ संरचनाओं से भूजल रिचार्ज का प्रयास
जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत 1.55 करोड़ से ज्यादा कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल भंडारण संरचनाएं तैयार की गई हैं। इनके प्रभाव का आकलन करने के लिए पहले चरण में 23 लाख संरचनाओं का अध्ययन किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 31 दिसंबर 2025 के बीच इन प्रयासों से लगभग 2.43 अरब घन मीटर भूजल रिचार्ज होने का अनुमान लगाया गया।
हालांकि, भूजल स्तर में सुधार केवल रिचार्ज संरचनाओं पर निर्भर नहीं करता। बारिश की मात्रा, मिट्टी की बनावट, पानी के इस्तेमाल और संरचनाओं की स्थिति का भी इस पर असर पड़ता है। इसलिए इनकी नियमित देखभाल और प्रभाव की निगरानी जरूरी है।
जल संचय जन भागीदारी के दो चरण
इस पहल के पहले चरण को जल संचय जन भागीदारी 1.0 के रूप में 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक लागू किया गया। इसमें समुदायों, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और लागत आधारित प्रयासों के जरिए जल संरक्षण के कामों को बढ़ावा दिया गया।
इसके बाद 1 जून 2025 को दूसरा चरण शुरू किया गया। इसमें उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां भूजल का अत्यधिक दोहन हुआ है या जल स्तर गंभीर स्थिति में है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार कम लागत वाले जल संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दी गई।
2026 में भी बढ़ाई जा रही जनभागीदारी
1 जून 2026 को शुरू की गई जल संचय जन भागीदारी और ‘कैच द रेन’ की संयुक्त पहल के तहत वर्षा जल संग्रह, भूजल रिचार्ज और पारंपरिक जल स्रोतों के सुधार पर जोर दिया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ कार्यक्रम, जल स्रोतों के पुनरुद्धार और अन्य सरकारी योजनाओं के संसाधनों को भी जोड़ा गया है।
ग्राम पंचायतों, शहरी निकायों, महिला समूहों, युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी को इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। जिला स्तर पर जल शक्ति केंद्र लोगों को वर्षा जल संग्रह की तकनीक और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक जल संरक्षण योजनाओं की जानकारी देने में मदद करते हैं।



