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मोहन सरकार का विवादों के बीच अफसरों पर एक्शन, 120 दिन में 22 कलेक्टर और 12 एसपी बदले

भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार (Mohan government) ने पिछले 120 दिनों में प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं। इस दौरान 22 जिलों के कलेक्टर और 12 जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) बदले गए हैं। जुलाई से अक्टूबर के बीच हुए इन फेरबदलों में कई ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं, जिनकी पोस्टिंग विवादों या किसी बड़ी घटना के बाद प्रभावित हुई। जहरीली शराब से मौतें, किसान आंदोलन, मुआवजे को लेकर विरोध और प्रशासनिक स्तर पर सामने आए विवाद इन बदलावों की प्रमुख वजहों के रूप में चर्चा में रहे।

नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने 23 जुलाई को कार्यभार संभाला था। इसके बाद जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व बदलने का सिलसिला तेज हुआ। कुछ मामलों में कलेक्टर और एसपी दोनों को हटाया गया, तो कहीं एक ही जिले में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की नई टीम तैनात की गई। हालांकि, सरकार ने जिन अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग से हटाया, उनमें से कुछ को बाद में दूसरी जगह महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी हैं।

जहरीली शराब कांड के बाद सागर और देवास में बदलाव

सागर जिले की बंडा तहसील में सितंबर में जहरीली शराब पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। वे खुद भी सागर पहुंचे थे। हालांकि, घटना के तत्काल बाद जिले के कलेक्टर और एसपी को नहीं हटाया गया।

27 अक्टूबर (Mohan government) को जारी तबादला आदेश में सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया को हटा दिया गया। उनकी जगह दिलीप कुमार यादव को कलेक्टर और संजीव कुमार सिन्हा को एसपी बनाया गया है। इसी तरह देवास में भी जहरीली शराब से मौतों के बाद कलेक्टर ऋतुराज और एसपी पुनीत गहलोत को हटाया गया। देवास की नई कलेक्टर नेहा मीना को बनाया गया है। वे इससे पहले सिवनी की कलेक्टर थीं। सिवनी की जिम्मेदारी अंजू अरुण कुमार को सौंपी गई है, जबकि बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा को देवास भेजा गया है।

13 अक्टूबर को 11 जिलों के कलेक्टर बदले

सरकार ने 13 अक्टूबर को एक साथ 11 जिलों के कलेक्टरों की जिम्मेदारी बदली थी। इस सूची में पन्ना, मऊगंज, जबलपुर, नर्मदापुरम, हरदा, सिंगरौली, बालाघाट, शाजापुर, बुरहानपुर, भिंड और रायसेन शामिल थे। इन जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक कामकाज में बदलाव किया गया।

इससे पहले भी अलग-अलग समय पर कई जिलों में कलेक्टरों की पोस्टिंग बदली गई थी। कुल मिलाकर 120 दिनों के भीतर 22 जिलों में कलेक्टरों के बदलाव ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा बढ़ाई है। खास बात यह है कि कई फेरबदल उन जिलों में हुए, जहां कानून-व्यवस्था, जनविरोध या प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे।

पुलिस महकमे में भी लगातार बदलाव

कलेक्टरों के साथ पुलिस अधीक्षकों की पोस्टिंग में भी बदलाव का सिलसिला जारी रहा। जुलाई से अक्टूबर के बीच शाजापुर, शहडोल, टीकमगढ़ और श्योपुर सहित कई जिलों में एसपी बदले गए। 27 अक्टूबर के आदेश में सागर और देवास के एसपी की जिम्मेदारी भी बदली गई। इसके अगले दिन यानी 28 अक्टूबर को नर्मदापुरम, अलीराजपुर, पन्ना, बैतूल और हरदा में नए पुलिस अधीक्षकों की पोस्टिंग की गई।

इस तरह प्रशासनिक फेरबदल केवल कलेक्टरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पुलिस व्यवस्था में भी लगातार बदलाव किए गए। कई जिलों में नई प्रशासनिक और पुलिस टीमों के जरिए व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

हटाए गए अधिकारियों को फिर मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

इन तबादलों का एक अहम पहलू यह भी है कि कुछ अधिकारियों को विवाद या घटना के बाद फील्ड पोस्टिंग से हटाया गया, लेकिन बाद में उन्हें फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी गई। बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले के बाद हटाए गए कुमार सत्यम को दो महीने के भीतर दूसरी जगह कलेक्टर बनाया गया।

इसी तरह इंदौर नगर निगम में पदस्थापना के दौरान भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड से जुड़े दिलीप कुमार यादव और रोहित सिसोनिया को भी बाद में नई जिम्मेदारियां दी गईं। दिलीप कुमार यादव को अब सागर कलेक्टर बनाया गया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि सरकार ने कुछ अधिकारियों को घटनाओं के बाद तत्काल पद से हटाया, लेकिन बाद में उन्हें दूसरे जिलों में जिम्मेदारी भी सौंपी।

किसान आंदोलन और मुआवजे के विरोध का भी असर

इन 120 दिनों के दौरान किसान आंदोलन और मुआवजे को लेकर हुए विरोध भी प्रशासनिक फेरबदल (Mohan government) की चर्चा में रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, किसान आंदोलन के बीच छह अधिकारियों को पद से हटाया गया। वहीं, जहरीली शराब कांड के बाद छह आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की फील्ड पोस्टिंग प्रभावित हुई।

हालांकि, हर तबादले के पीछे सरकार की ओर से अलग-अलग प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। इसलिए सभी बदलावों को सीधे दंडात्मक कार्रवाई मानना उचित नहीं होगा। लेकिन कम समय में 22 जिलों के कलेक्टर और 12 जिलों के एसपी बदलने से यह जरूर स्पष्ट है कि मोहन सरकार ने जिलों में प्रशासनिक और पुलिस नेतृत्व को लेकर बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया है।

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